#राजनीति
April 21, 2026
हिमाचल में ट्रांसफर, प्रमोशन और भर्तियों पर ब्रेक, सुक्खू सरकार की रफ्तार पर भी आयोग ने लगाई बंदिशें!
हिमाचल के शहरी क्षेत्रों में आचार संहिता लगने के बाद चुनाव आयोग की बंदिशें
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में चुनावी बिगुल बजते ही सत्ता और प्रशासन के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो गई है। इसके लागू होते ही सुक्खू सरकार के 'व्यवस्था परिवर्तन' की गति पर एक महीने से अधिक समय के लिए 'चुनावी ब्रेक' लग गया है। अब न तो अधिकारियों की कुर्सियां बदलेंगी और न ही बेरोजगारों के लिए नई भर्तियों के विज्ञापन निकलेंगे। यानी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक कोई बड़ा प्रशासनिक फैसला नहीं लिया जा सकेगा।
आचार संहिता लागू होते ही सरकार की कार्यप्रणाली भी तय दायरे में सिमट गई है। अब लगभग 19 मई (नगर पंचायत व परिषद) और 31 मई (नगर निगम) तक प्रदेश के शहरी इलाकों में ट्रांसफर, प्रमोशन और नई भर्तियों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। बिना चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के सरकार कोई भी बड़ा प्रशासनिक फेरबदल नहीं कर पाएगी। लंबे समय से पदोन्नति की राह देख रहे कर्मचारियों और नई नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं को अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सब्र करना होगा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: निर्विरोध चुनाव पर मिलेगी एक करोड़ की सौगात, उम्मीदवारों को नहीं मिलेंगे मनपसंद चुनाव चिन्ह
आचार संहिता के कड़े नियमों ने मंत्रियों और रसूखदारों के विशेषाधिकारों पर भी अंकुश लगा दिया है। अब कोई भी मंत्री, विधायक, एडवाइजर या बोर्ड-निगमों के चेयरमैन/वाइस चेयरमैन चुनाव प्रचार के लिए सरकारी गाड़ियों और संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सत्ता का मोह त्याग कर अब इन दिग्गजों को निजी वाहनों में ही जनता के बीच जाना होगा। सरकारी दौरों और दौरों के दौरान होने वाली राजनीतिक घोषणाओं पर भी आयोग की पैनी नजर रहेगी।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: 51 निकाय के बाद अब इस दिन होगा पंचायत चुनाव का ऐलान, उम्मीदवारों को मिलेंगे ये 115 चुनाव चिन्ह
शहरी क्षेत्रों में अब न तो नई परियोजनाओं के शिलान्यास होंगे और न ही उद्घाटन की पट्टिकाएं लगेंगी। सरकार कोई भी ऐसा 'लोकलुभावन' फैसला नहीं ले पाएगी जिससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। सरकारी खर्च पर होने वाले विज्ञापनों और उपलब्धियों के बखान पर भी रोक लगा दी गई है। सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों से राजनीतिक पोस्टर-बैनर हटाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
राज्य चुनाव आयोग ने सभी जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी तरह तटस्थ रहकर काम करना होगा और किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में काम करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकारी भवनों, गाड़ियों और अन्य संसाधनों का चुनावी इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सार्वजनिक स्थानों से पोस्टर-बैनर और प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही, सरकार अब जनता को प्रभावित करने वाले किसी भी नए वादे या विज्ञापन जारी नहीं कर सकेगी।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में चुनावी शंखनाद : आचार संहिता लागू, 17 मई को होगी वोटिंग- उसी दिन आएंगे नतीजे
फिलहाल यह आचार संहिता केवल शहरी क्षेत्रों में लागू हुई है, लेकिन पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही ग्रामीण इलाकों में भी यही सख्ती देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर, चुनावी माहौल के बीच हिमाचल में प्रशासनिक फैसलों पर फिलहाल ‘पॉज’ लग चुका है और पूरा फोकस निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर केंद्रित हो गया है।