#राजनीति
April 18, 2026
विक्रमादित्य सिंह का तंज: कंगना का सामान्य ज्ञान कमजोर, उन्हें नहीं पता हिमाचल में कितनी महिला MLA
केंद्र के महिला आरक्षण बिल पर बोले विक्रमादित्य, चुनावों के बीच बिल लाना चुनावी स्टंट
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शिमला। हिमाचल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा सांसद कंगना रनौत के एक बयान पर तीखा तंज कस दिया। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जिन्हें यह तक नहीं पता कि हिमाचल विधानसभा में कितनी महिला विधायक हैं, वे महिला सशक्तिकरण की बात कर रही हैं, यह हास्यास्पद है।
दरअसल कंगना ने संसद में अपने भाषण के दौरान कहा था कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा में केवल एक ही महिला विधायक है। इस बयान को विक्रमादित्य सिंह ने हास्यास्पद करार दिया और कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक सांसद को अपने ही राज्य की विधानसभा की स्थिति के बारे में इतनी बुनियादी जानकारी भी नहीं है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह जानकर बहुत ही अचरज और हास्य होता है कि हिमाचल प्रदेश से सांसद चुनी गई महिला, जिन्हें राज्य के लोगों ने बड़ी उम्मीदों के साथ संसद भेजा है, उन्हें यह तक पता नहीं कि उनकी अपनी विधानसभा में कितनी महिला विधायक हैं। इस समय हिमाचल विधानसभा में तीन महिला विधायक हैं। एक भाजपा से और दो कांग्रेस से। जिस सांसद को यह बुनियादी जानकारी नहीं है, वह महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं, जो पूरी तरह से खोखली और हास्यास्पद हैं।
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संसद में हिमाचल में एक महिला विधायक के बयान को लेकर कंगना रणौत को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। लोग उनकी बौद्धिक क्षमता और एक सांसद के रूप में उनकी योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा है कि यह मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए एक बड़ा दुर्भाग्य है कि उनकी सांसद को अपने राज्य के बारे में इतनी कम जानकारी है।
विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल पर भी भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और जो बिल 2023 में लाया गया था, कांग्रेस उसे ही पारित करने के पक्ष में थी। अगर उस बिल को संसद में लाया जाता, तो कांग्रेस उसका पूरा समर्थन करती। लेकिन केंद्र सरकार ने अपने राजनीतिक हित साधने के लिए एक नया बिल लाया और उसे पारित करने की कोशिश की, जिसे विपक्षी दलों ने खारिज कर दिया।
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लोक निर्माण विभाग मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस बिल के जरिए डेमोग्राफी बदलने और अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के पीछे छिपकर महिला हितैषी होने का ढोंग कर रही है, लेकिन उनकी नीतियां इसके बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भाजपा महिलाओं की इतनी ही हितेषी थी, तो 2023 के बिल को क्यों नहीं पारित किया गया।
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विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश के कई राज्यों में इस समय विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और चुनावों के बीच लोकसभा का सत्र बुलाकर महिला आरक्षण का बिल पास करवाने का प्रयास किया गया, ताकि विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। यह पूरी तरह से एक राजनीतिक एजेंडा है और भाजपा केवल अपने राजनीतिक मकसद से इस बिल को लाई थी, जो लोकसभा में पारित नहीं हो पाया।
कंगना रणौत के बयान और विक्रमादित्य सिंह के तीखे तंज के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक राजनीतिक एजेंडा बता रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी ज्यादा तूल पकड़ सकता है और हिमाचल की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है।