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April 23, 2026

हिमाचल कांग्रेस में निकाय चुनाव से पहले ही पड़ गई फूट! पार्टी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठा ये दिग्गज नेता

ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति से भड़का असंतोषए संगठन के फैसले पर उठे सवाल

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। सत्तारूढ़ दल के भीतर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पार्टी के अपने ही वरिष्ठ नेता शिमला स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सुक्खू सरकार और कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही खामोश नाराजगी को भी सार्वजनिक कर दिया है।

भूख हड़ताल पर बैठा कांग्रेस नेता

दरअसल सिरमौर जिले के भंगाणी जोन के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप चौहान ने पांवटा साहिब ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति का विरोध करते हुए 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि क्षेत्रीय संतुलन और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर संगठन में ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिन पर कार्यकर्ताओं को भरोसा नहीं है। इसी नाराजगी ने अब खुले विरोध का रूप ले लिया है।

 

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गद्दारों की ताजपोशी और वफादारों की बलि

धरने पर बैठे प्रदीप चौहान ने सीधे तौर पर संगठन की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए दिन-रात खून-पसीना एक करते हैं, उन्हें नजरअंदाज कर मौकापरस्त नेताओं को मलाईदार ओहदे बांटे जा रहे हैं। उनका मुख्य विरोध सरदार हरप्रीत रतन की नियुक्ति को लेकर है। चौहान ने दावा किया कि हरप्रीत रतन विधानसभा चुनाव के दौरान बागी होकर भाजपा में शामिल हो गए थे और अब वापसी करते ही उन्हें इनाम के तौर पर ब्लॉक अध्यक्ष बना दिया गया। 

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हरप्रीत को अध्यक्ष पद से हटाने की उठाई मांग

उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सरदार हरप्रीत रतन को तुरंत पद से हटाने और गिरिपार से ब्लॉक अध्यक्ष बनाने की मांग की है। यही नही उन्होंने दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भी धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। प्रदीप चौहान ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि उनकी जायज मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन दिल्ली के गलियारों तक पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के पास जाकर अपनी आवाज उठाएंगे और दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भी अनशन पर बैठेंगे।

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ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति ने खड़े किए कई विवाद

हिमाचल कांग्रेस में विवादों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब प्रदेश नेतृत्व ने 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की। गौर करने वाली बात यह है कि इन नियुक्तियों ने शुरू से ही बगावत की जमीन तैयार कर दी थी। पहले 71 ब्लॉक अध्यक्षों में एक भी महिला को जगह न देने पर 'नारी शक्ति' की अनदेखी का मुद्दा उठा, जिसके बाद मुस्लिम नेताओं ने भी अपनी उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाए। अब इस विवाद ने नया और अधिक उग्र मोड़ ले लिया है।

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वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान की नाराजगी पांवटा साहिब ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर है। उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया कि गिरिपार क्षेत्र को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। चौहान ने प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार से तीखा सवाल पूछा कि क्या गिरिपार के लोग केवल 'नारेबाजी' करने के लिए ही बचे हैं?

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चिंता

हिमाचल में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर उभरी यह खुली नाराजगी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है। विपक्ष को भी अब सरकार और संगठन को घेरने का नया मौका मिल गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते पार्टी ने इन नाराज स्वरों को शांत नहीं किया, तो इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

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संगठन पर उठे गंभीर सवाल

अपने ही दल के नेता का कांग्रेस कार्यालय के बाहर बैठना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर संवाद की कमी गहराती जा रही है। जिस पार्टी ने हाल के वर्षों में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की, उसी के भीतर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। यह घटनाक्रम हिमाचल कांग्रेस के लिए केवल एक संगठनात्मक विवाद नहीं, बल्कि साख से जुड़ा बड़ा राजनीतिक संकट बनता दिखाई दे रहा है।

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