रोहड़ू (शिमला)। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू और रामपुर दौरे के बाद पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का दर्द खुलकर सामने आया है।
प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान वीरभद्र सिंह की तस्वीर पोस्टरों में नहीं होने और मंच से उनके नाम या विकास कार्यों का उल्लेख नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी अधिक समय नहीं हुआ है और जिस रोहड़ू से उनका दशकों का राजनीतिक जुड़ाव रहा, वहां उन्हें इतनी जल्दी भुला दिया जाना उनके लिए पीड़ादायक है।
अपने ही गढ़ में राजा साहब की तस्वीर तक नहीं
प्रतिभा सिंह की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण यही रहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू प्रवास के दौरान लगाए गए पोस्टरों में उन्हें वीरभद्र सिंह की तस्वीर नजर नहीं आई। उन्होंने कहा कि रोहड़ू में कांग्रेस के किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी ने वीरभद्र सिंह का एक भी पोस्टर नहीं लगाया। प्रतिभा सिंह ने इसे अपने लिए दुखद बताते हुए कहा कि जिस नेता ने दशकों तक हिमाचल प्रदेश की सेवा की और कांग्रेस को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसके योगदान को सार्वजनिक मंचों पर याद किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह की विरासत को कितना सम्मान मिल रहा है, इस सवाल ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा पकड़ ली है।
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प्रतिभा सिंह बोलीं- मंच से नाम तक नहीं लिया
प्रतिभा सिंह ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में जब हिमाचल के विकास की चर्चा हो तो वीरभद्र सिंह के योगदान का उल्लेख होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में उनके द्वारा किए गए कार्य किसी से छिपे नहीं हैं। उनका कहना था कि ‘राजा साहब’ के कामों का जिक्र तो होना चाहिए। वरिष्ठ नेताओं के योगदान को याद करना पार्टी की जिम्मेदारी है और इसे किसी गुट या व्यक्ति विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
वीरभद्र को इतनी जल्दी कैसे भूल गई कांग्रेस
प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह के निधन को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। ऐसे में रोहड़ू जैसे क्षेत्र में, जहां उनका जनता से वर्षों पुराना रिश्ता रहा, वहां किसी कार्यक्रम में उनका नाम तक नहीं लिया जाना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सवालिया अंदाज में कहा कि सभी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि रोहड़ू में आज क्या हो रहा है। प्रतिभा सिंह के इस बयान ने पार्टी के भीतर वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।
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कार्यकर्ता भी लगा सकते थे पोस्टर
प्रतिभा सिंह ने यह भी कहा कि यदि किसी एक व्यक्ति ने वीरभद्र सिंह का पोस्टर नहीं लगाया था तो कांग्रेस के दूसरे पदाधिकारी और कार्यकर्ता उनकी तस्वीर लगा सकते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा गुटबाजी को बढ़ावा देने की नहीं रही है। पार्टी को अपने सभी वरिष्ठ नेताओं के योगदान और संघर्ष का सम्मान करना चाहिए। प्रतिभा सिंह के इस बयान को पार्टी के भीतर सम्मान और राजनीतिक विरासत से जुड़े सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर आरोप लगाने के बजाय संगठन और कार्यकर्ताओं से वरिष्ठ नेताओं को याद रखने की अपील की।
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परमार का दिया उदाहरण
प्रतिभा सिंह ने अपनी बात रखते हुए हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जब भी वह नाहन या सिरमौर क्षेत्र में जाती हैं तो डॉ. परमार को याद करना नहीं भूलतीं। इसी तरह उनका कहना था कि वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए उनके कार्यों और योगदान को सार्वजनिक मंचों पर सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए।
रोहड़ू से रहा वीरभद्र सिंह का दशकों पुराना रिश्ता
वीरभद्र सिंह और रोहड़ू का राजनीतिक रिश्ता बेहद पुराना रहा है। वह 1990 से 2007 तक लगातार पांच बार रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। यही वजह है कि रोहड़ू को उनकी प्रमुख राजनीतिक कर्मभूमियों में गिना जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान उनकी तस्वीर और नाम को लेकर प्रतिभा सिंह की नाराजगी ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।
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सुक्खू दौरे के बाद फिर चर्चा में कांग्रेस की अंदरूनी सियासत
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे में विकास कार्यों के कार्यक्रमों के अलावा विद्यार्थियों के साथ संवाद और एंटी-चिट्टा रैली जैसे कार्यक्रम भी हुए। लेकिन दौरा खत्म होने के बाद राजनीतिक चर्चा का केंद्र वीरभद्र सिंह की गैरमौजूदगी और प्रतिभा सिंह की नाराजगी बन गई। एक तरफ मुख्यमंत्री सुक्खू रोहड़ू में अपनी सरकार के विकास कार्यों और योजनाओं को लेकर सक्रिय नजर आए, वहीं दूसरी तरफ प्रतिभा सिंह के बयान ने पार्टी की पुरानी राजनीतिक विरासत और मौजूदा दौर के बीच संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
