शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर एक अहम पहल पर विचार किया जा रहा है, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसे लागू किया जा सकेगा या नहीं। राज्य निर्वाचन आयोग बुजुर्ग मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा देने पर मंथन कर रहा है, हालांकि संसाधनों की कमी इस योजना के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
22 हजार वार्डों में लागू करने की योजना
राज्य में पंचायतों के करीब 22 हजार वार्ड हैं, जहां इस सुविधा को लागू करने का प्रस्ताव है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो बुजुर्ग और असहाय मतदाताओं को मतदान केंद्र तक जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह एक बड़ी सुविधा मानी जा रही है।
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संसाधन और समय बने चुनौती
हालांकि, आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस योजना को लागू करने के लिए जरूरी अतिरिक्त स्टाफ, प्रशिक्षण और समय की है। पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाने की समयसीमा तय है, ऐसे में सीमित समय में नई व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा।
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पहले बड़े चुनावों में मिलती है सुविधा
गौरतलब है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं के लिए घर बैठे मतदान की सुविधा पहले से ही विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उपलब्ध है। कई राज्यों ने इसे अपने स्तर पर भी लागू किया है। हिमाचल राज्य निर्वाचन आयोग भी इसी मॉडल को पंचायत चुनावों में लागू करना चाहता है, लेकिन फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
अप्रैल में अधिसूचना, मई में मतदान संभव
सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव की अधिसूचना अप्रैल के तीसरे सप्ताह में जारी हो सकती है। 20 अप्रैल तक मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। मतदान 15 मई के बाद तीन चरणों में करवाया जा सकता है।
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अलग-अलग चरणों में होंगे पंचायत और नगर निकाय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकाय चुनावों को अलग-अलग चरणों में करवाने की तैयारी कर रहा है, ताकि चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए आयोग जल्द ही अधिकारियों के साथ बैठक करेगा।
