शिमला। देवभूमि हिमाचल की सियासत में राजघरानों का वर्चस्व हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। रामपुर बुशहर रियासत और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के परिवार के दशकों पुराने राजनीतिक दबदबे के बाद अब प्रदेश की राजनीति में एक और शाही परिवार की विधिवत एंट्री हो गई है। जुन्गा राजघराने से संबंध रखने वाले और क्योंथल रियासत के राजा खुश विक्रम सेन ने पंचायत चुनाव के दंगल में उतरकर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह गर्मा दिया है।

चमियाना वार्ड बना हॉट सीट

खुश विक्रम सेन ने जिला शिमला के चमियाना वार्ड से जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन भरते ही इस सीट को प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में ला खड़ा किया है। उनके मैदान में उतरने से यह सीट अब प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शुमार हो गई है। उनके मैदान में उतरने को सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि बड़े सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि वह प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के करीबी रिश्तेदार (ममेरे भाई) हैं, जिससे इस चुनाव को और भी दिलचस्प रंग मिल गया है।

 

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कांग्रेस के बाद अब भाजपा को भी मिला अपना 'राजा'

हिमाचल की राजनीति में अब ‘राजाओं’ की मौजूदगी को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस के पास पहले से ही विक्रमादित्य सिंह के रूप में शाही पृष्ठभूमि वाला चेहरा है, तो वहीं अब खुश विक्रम सेन के मैदान में उतरने से भाजपा खेमे को भी एक ‘राजा’ मिल गया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले समय में यह शाही मुकाबला प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।

शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन

शुक्रवार को खुश विक्रम सेन ने भारी जनसैलाब और समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके खिलाफ कांग्रेस ने कसुम्पटी के कद्दावर नेता और मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले भूपेंद्र कंवर को उतारा है। ऐसे में यह चुनावी समर अब केवल एक जिला परिषद की सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए नाक की लड़ाई बन गया है। जानकारों का मानना है कि खुश विक्रम को राजघराने की पारंपरिक विरासत और भाजपा के सांगठनिक सहयोग का बड़ा लाभ मिल सकता है।

 

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रिश्तों की अपनी जगह, राजनीति की अपनी राह

नामांकन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए खुश विक्रम सेन ने सधे हुए अंदाज में अपना विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य व्यवस्था को समझना और बागवानों व ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता पर हल करना है। हालांकि उन्होंने राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों को अलग रखते हुए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह को अपना बड़ा भाई बताया, लेकिन साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए सिस्टम को बदलने की बात भी कही।

 

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रोचक होगी सियासी जंग

क्योंथल रियासत के राजा के चुनाव दंगल में कूदने से शिमला जिला की स्थानीय राजनीति के साथ-साथ बड़े सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ना तय है। एक ओर जहां रामपुर राजघराने की विरासत को विक्रमादित्य सिंह आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं अब जुन्गा राजघराने के माध्यम से भाजपा ने एक बड़ा दांव खेला है। आने वाले दिनों में यह चुनावी टक्कर न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि पूरे प्रदेश के सियासी माहौल को प्रभावित कर सकती है।

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हिमाचल के इस 'राजशाही' मुकाबले ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में प्रचार की जंग और भी तीखी होने वाली है। क्या जुन्गा के 'राजा' अपनी पहली चुनावी पारी में फतह हासिल कर पाएंगे या कांग्रेस का संगठनात्मक किला अभेद्य रहेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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