#राजनीति
May 6, 2026
हिमाचल में बदली परिवार की परिभाषा, सास-ससुर ने किया अवैध कब्जा- तो बहू भी नहीं लड़ पाएगी चुनाव
सुक्खू सरकार के संशोधित विधेयक को राज्यपाल की मिली मंजूरी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की रणभेरी बजते ही सुक्खू सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया हैए जिसने राज्य की ग्रामीण सियासत में हड़कंप मचा दिया है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से ठीक 24 घंटे पहले राज्य सरकार ने पंचायत राज अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन कर परिवार की परिभाषा ही बदल डाली है। इस नए कानून के लागू होने से अब उन महिलाओं (बहू) के चुनावी सपनों पर पानी फिर गया है, जिनके सास-ससुर ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने नामांकन प्रक्रिया से ऐन पहले सुक्खू सरकार के पंचायत राज अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इस संशोधन के जरिए पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 122 में बदलाव किया गया है।
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सबसे महत्वपूर्ण बदलाव परिवार की परिभाषा में हुआ है। अब तक परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों का ही जिक्र था, जिससे अतिक्रमणकारी परिवारों की बहुएं कानून की पेचीदगियों का फायदा उठाकर चुनाव लड़ लेती थीं। लेकिन अब नई परिभाषा के तहत बहू को भी परिवार का अनिवार्य हिस्सा मान लिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि सास-ससुर ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया है, तो उनकी बहू चुनाव लड़ने के लिए अपात्र मानी जाएगी।
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हिमाचल की 3758 पंचायतों में कल यानी 7 मई से नामांकन का दौर शुरू हो रहा है। नामांकन 7, 8 और 11 मई को भरे जाने हैं। चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर रही सैकड़ों महिलाओं के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। कई गांवों में बहुएं ही अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन नामांकन से ठीक एक दिन पहले आए इस आदेश ने उनकी उम्मीदों पर अतिक्रमण कर लिया है।
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गौरतलब है कि साल 2020 के पंचायत चुनावों के दौरान भी राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार से परिवार की परिभाषा बदलने का आग्रह किया था। उस समय तर्क दिया गया था कि अतिक्रमणकारी परिवारों के लोग अपनी बहुओं को चुनाव लड़ाकर कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। हालांकि, उस वक्त कोरोना महामारी और समय के अभाव के कारण यह संशोधन नहीं हो पाया था, जिसे अब सुक्खू सरकार ने अमलीजामा पहना दिया है।
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वहीं दूसरी तरफ हिमाचल हाईकोर्ट ने आशा वर्करों को बड़ी राहत प्रदान की है। हिमाचल हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार के उस स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने रीना देवी व अन्यों द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात यह रोक लगाते हुए राज्य सरकार सहित राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए।