शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार द्वारा मंदिरों से सरकारी योजनाओं के लिए धन लेने की पहल पर विपक्ष ने कड़ा एतराज जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय सनातन धर्म और हिंदू आस्थाओं के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार अधिकारियों पर दबाव डालकर मंदिर ट्रस्टों से धन जुटाने की कोशिश कर रही है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।

मंदिरों से सरकारी योजनाओं के लिए धन लेने का आरोप

जयराम ठाकुर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार के अधीन करीब 36 प्रमुख मंदिर हैं। सरकार ने इन मंदिरों से मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना और सुख शिक्षा योजना के लिए धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

 

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उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन मंदिर ट्रस्टों से जबरन धन लेने के लिए दबाव बना रहा है, ताकि इसे सरकारी योजनाओं में खर्च किया जा सके।

सनातन विरोधी सरकार अब मंदिरों से ले रही फंड’

अपने बयान में जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर सरकार सनातन धर्म और हिंदू आस्थाओं के खिलाफ बयानबाजी करती है, वहीं दूसरी ओर मंदिरों से धन लेकर अपनी योजनाओं को संचालित करना चाहती है।

 

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उन्होंने कहा कि मंदिरों से पहले कभी इस प्रकार से फंड नहीं लिया गया था, केवल प्राकृतिक आपदाओं या विशेष परिस्थितियों में ही मंदिर ट्रस्टों से योगदान मांगा जाता था।

सरकारी पत्र पर मचा विवाद

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के एक पत्र का हवाला देते हुए दावा किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार के कला, भाषा और संस्कृति विभाग ने 29 जनवरी को सभी जिला उपायुक्तों और आयुक्त (मंदिर)-सह-अतिरिक्त उपायुक्तों को पत्र लिखकर मंदिर ट्रस्टों से मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना और मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना में आर्थिक योगदान देने की अपील की है।

 

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सरकार का तर्क है कि ये योजनाएं सामाजिक कल्याण से जुड़ी हैं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए चलाई जा रही हैं। सुख आश्रय योजना का उद्देश्य अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों को सहारा देना है, जबकि सुख शिक्षा योजना शिक्षा के क्षेत्र में सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है।

भाजपा का विरोध, विधानसभा में उठेगा मुद्दा

जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा इस फैसले का विरोध करेगी और आगामी विधानसभा सत्र में इसे प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने मंदिर ट्रस्टों और श्रद्धालुओं से भी इस निर्णय का विरोध करने की अपील की। इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्रदेश की सियासत में इस मुद्दे पर गहमागहमी तेज हो गई है। आगामी विधानसभा सत्र में इसे लेकर तीखी बहस होने की संभावना है।

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