शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज तीसरे दिन प्रदेश में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नशे को रोकने के लिए केवल बड़े-बड़े कार्यक्रम किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का दावा

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया कि प्रदेश में युवाओं के बीच नशे की समस्या तेजी से फैल रही है और सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल साबित हो रही है। इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर पलटवार किया।

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उन्होंने कहा कि नशे की समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि पिछले पांच वर्षों की नीतियों का परिणाम है।

रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाएगा यह वॉकआउट

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब पूर्व सरकार सत्ता में थी, तब इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए गए। उनके इस बयान के बाद सदन में माहौल गरमा गया और विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बढ़ गई कि भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

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हालांकि, स्पीकर ने स्पष्ट किया कि यह वॉकआउट रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाएगा। इस दौरान भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नशे से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को समझना जरूरी है, क्योंकि कई घरों के युवा इसकी वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया सरकार की कार्रवाई का हवाला

मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 11 पुलिस कर्मियों और 9 अन्य सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि नशा तस्करों की संपत्तियों को भी ध्वस्त किया गया है। सरकार का दावा है कि नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और आने वाले समय में इस दिशा में और तेज कार्रवाई होगी।

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