कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछली रात कुल्लू जिले के दुर्गम गांव शरची में रहकर एक बार फिर अपनी ग्रामीण संवेदना को जमीन पर उतारा। बंजार उपमंडल के इस अंतिम गांव में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ मिलकर रात बिताई और उनके दुख-सुख की सीधी बात की। इससे पहले वे डोडराक्वार जैसे दुर्गम क्षेत्र में भी इसी तरह की पहल कर चुके हैं।

गांव की हर जरूरत का होगा समाधान

गांव पहुंचते ही शरची पंचायत प्रधान रामेश्वरी ठाकुर और ग्रामीणों ने सीएम का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। गांव की देवी मां की तस्वीर उन्हें भेंट की गई। सीएम ने कहा कि मैं गांव में रहकर लोगों से मिलना चाहता हूं, ताकि जमीनी सच्चाई समझ सकूं। यहां जो भी मांगे पंचायत ने रखी हैं, वे पूरी होंगी।

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पारंपरिक नाटी भी डाली

वहीं, उन्होंने भरोसा दिलाया कि गांव की सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर होगा। बजट प्रावधान होते ही कार्यों की शुरुआत कर दी जाएगी। बता दें की सीएम सुक्खू ने रात के समय गांव वालों से बातचीत की और नाटी में भी भाग लिया। 

बच्चों के साथ बिताया समय

कार्यक्रम के दौरान सीएम बच्चों के साथ घुलते-मिलते नजर आए। कई बच्चों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सीएम ने उन्हें दुलारते हुए कहा कि ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार गंभीर है।

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उन्होंने यह भी ऐलान किया कि शरची को पर्यटन मानचित्र पर लाने की कोशिश होगी।  सीएम ने कहा कि यह गांव बेहद सुंदर है और यहां होम-स्टे, ट्रैकिंग और स्थानीय संस्कृति को जोड़कर पर्यटन का नया रास्ता खोला जा सकता है। 

क्यों खास है शरची में मुख्यमंत्री की मौजूदगी?

शरची गांव भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम क्षेत्र में आता है। यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। मुख्यमंत्री द्वारा इस गांव में रात बिताना एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश भी है  कि अब नीति बनाने वाले खुद धरातल पर जाकर नब्ज टटोल रहे हैं।

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एक नई परंपरा की शुरुआत?

सीएम सुक्खू की यह पहल प्रदेश में मुख्यमंत्री और ग्रामीण समाज के बीच एक नए संवाद की शुरुआत मानी जा रही है। यह सिर्फ एक रात गांव में रुकने भर की बात नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को गांवों की प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की एक गंभीर कोशिश है।

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