शिमला। हिमाचल प्रदेश में पेपर लीक और सरकारी भर्तियों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सामने आए पेपर लीक मामलों की जांच का मुद्दा उठाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पलटवार किया है। जयराम ठाकुर ने सरकार पर युवाओं को रोजगार देने में विफल रहने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए।
CM के बयान पर जयराम ठाकुर का पलटवार
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री यह दावा कर रहे हैं कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक नहीं हुआ, लेकिन असल सवाल यह है कि सरकार ने अब तक कितनी बड़ी भर्ती परीक्षाएं आयोजित की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं की संख्या कम होने के कारण पेपर लीक नहीं होने का दावा करना कोई उपलब्धि नहीं है।
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उन्होंने प्री-नर्सरी शिक्षकों की भर्ती का उदाहरण देते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए। जयराम ठाकुर के अनुसार, इस भर्ती के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि का प्रावधान था, लेकिन विवाद और विरोध के बाद प्रक्रिया रोक दी गई। उनका दावा है कि इसका असर छोटे बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा और कई शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे खर्च करके व्यवस्था चलानी पड़ी।
आउटसोर्स भर्ती को लेकर भी सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था को लेकर भी मौजूदा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधिकारियों और नर्सों की भर्ती के लिए आउटसोर्स कंपनियों का सहारा लिया गया और इस व्यवस्था को लेकर न्यायालय में भी सवाल उठे।
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जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाली इन नियुक्तियों के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं से मिलने वाले धन का इस्तेमाल होता है, फिर भी भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में विवाद खड़े हुए। उन्होंने सरकार के मंत्रियों के उन बयानों पर भी सवाल उठाए, जिनमें कथित तौर पर अपने विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को नौकरी दिलाने का दावा किया गया।
पुलिस भर्ती में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया
जयराम ठाकुर ने हालिया पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने बड़े स्तर पर नकल या गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उनके मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर पेपर खरीदने और बेचने के आरोपों में कुछ लोगों को पकड़ा गया तथा जांच के दौरान नकदी और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड भी सामने आए।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार ने मामले को आगे बढ़ाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और जांच को रोक दिया गया। जयराम ठाकुर ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई पुलिस भर्ती परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि पेपर लीक की जानकारी सामने आने पर उनकी सरकार ने तत्काल मामला दर्ज कराया था।
CBI रिपोर्ट को लेकर भी उठाए सवाल
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि जांच के लिए एसआईटी बनाई गई और मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश भी की गई। उन्होंने कहा कि उस समय परीक्षा रद्द कर नई लिखित परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए बस किराए में राहत देने और तय समय में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का भी दावा उन्होंने किया।
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जयराम ठाकुर के अनुसार, सरकार बदलने के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी की। उन्होंने दावा किया कि जांच में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका सामने आई थी और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के दौरान यह रिपोर्ट लंबे समय तक लंबित रही। जयराम ठाकुर ने कहा कि बाद में रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, इस मामले में सरकार का पक्ष और संबंधित जांच रिपोर्ट की आधिकारिक स्थिति अलग से महत्वपूर्ण होगी।
सरकारी नौकरियों के आंकड़ों पर भी बहस
नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी कर्मचारियों की संख्या का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 2022 में हिमाचल प्रदेश में 1.90 लाख से अधिक स्थायी कर्मचारी थे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में यह संख्या करीब 1.75 लाख रह गई है। इसी आंकड़े को आधार बनाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की रोजगार नीति युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी देने के बजाय आउटसोर्स व्यवस्था पर अधिक निर्भर हो रही है।
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पेपर लीक, आउटसोर्स भर्ती, सरकारी नौकरियों की संख्या और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दे हिमाचल की राजनीति में लगातार चर्चा के केंद्र में हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू और जयराम ठाकुर के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। फिलहाल जयराम ठाकुर ने सरकार से सवाल किया है कि केवल पेपर लीक न होने को उपलब्धि बताने के बजाय युवाओं के लिए नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाए।
