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July 28, 2026

हिमाचल : सेब सीजन में बढ़ी बागवानों की टेंशन- 900 रुपये दिहाड़ी ले रहे मजदूर, किराया भी बढ़ा

छोटे बागवानों पर सबसे ज्यादा असर, मजदूरों की कमी से बढ़ी दिहाड़ी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। इसके साथ ही बागवानों की चिंता भी बढ़ गई है। इस बार सेब की तुड़ान, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए मजदूरों की मांग बढ़ने से दिहाड़ी भी बढ़ रही है। जिस कारण बागवानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

900 तक पहुंची दिहाड़ी

इस बार प्रदेश में दिहाड़ी 800 से 900 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। बढ़ती मजदूरी का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम बागवानों पर पड़ रहा है, जिनकी उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

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मजदूरों की कमी से बढ़ी दिहाड़ी

बागवानों का कहना है कि सेब सीजन के दौरान मजदूरों की भारी मांग रहती है। ऐसे में मजदूरों की कमी का फायदा उठाकर दिहाड़ी मनमाने तरीके से बढ़ा दी जाती है। प्रशासन हर साल सेब ढुलाई के लिए परिवहन भाड़ा तो तय करता है, लेकिन मजदूरी की दरों को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। इसी कारण हर सीजन में बागवानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

छोटे बागवानों पर सबसे ज्यादा असर

ठियोग के बागवान पवन शर्मा, कोटखाई के सुरेश चौहान, संजीव शर्मा और चौपाल के मंजीत मेहता ने बताया कि सेब की तुड़ान, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए अलग-अलग मजदूरों की जरूरत होती है। मजदूरी बढ़ने से उत्पादन लागत में काफी इजाफा हो रहा है। बड़े बागवान किसी तरह इस खर्च को वहन कर लेते हैं, लेकिन सीमित उत्पादन वाले छोटे किसानों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है।

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मजदूरी की दर तय करने की मांग

बागवानों ने मांग की है कि जिस तरह प्रशासन सेब ढुलाई के लिए परिवहन भाड़ा निर्धारित करता है, उसी तरह सेब सीजन के दौरान मजदूरों की दिहाड़ी भी तय की जाए। उनका कहना है कि इससे मजदूरों और बागवानों दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे और किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होगा।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा

बागवानों के अनुसार यह मुद्दा पिछली जिला परिषद की बैठकों में भी कई बार उठाया जा चुका है। जिला उपायुक्त के समक्ष भी मजदूरी की दर तय करने की मांग रखी गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में हर साल सेब सीजन के दौरान बागवानों को बढ़ती मजदूरी के कारण आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।

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