शिमला। नव वर्ष 2026 की आहट के साथ ही हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर रौनक लौटती नजर आ रही है। करीब एक साल से अधिक समय से अपेक्षाकृत निष्क्रिय दिख रहा कांग्रेस का संगठन अब अचानक सक्रिय हो उठा है। वजह निगमों] बोर्डों और परिषदों में खाली पड़े अध्यक्ष] उपाध्यक्ष और सदस्य पदों पर होने वाली संभावित नियुक्तियां हैं। इसी उम्मीद में शिमला एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
कुर्सी के लिए शिमला की दौड़
राजधानी शिमला में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओकओवर से लेकर सचिवालय तक इन दिनों खासा जमावड़ा देखने को मिल रहा है। बधाई देने के बहाने नेता] कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े चेहरे मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं। इन मुलाकातों के पीछे औपचारिक शुभकामनाओं से ज्यादा निगम–बोर्डों में पद हासिल करने की कोशिश साफ झलक रही है।
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अध्यक्ष–उपाध्यक्ष पद के दावेदारों की लंबी कतार
प्रदेश सरकार के विभिन्न निगमों, बोर्डों और परिषदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के सदस्यों के लगभग 18 के करीब पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन्हीं पदों को लेकर कुर्सी के दावेदार सुबह से ही सचिवालय में डेरा डाले नजर आए। कुछ नेताओं ने तो अपने पुराने संगठनात्मक योगदान और चुनावी मेहनत की फाइलें भी तैयार कर रखी हैं।
बधाई के साथ पैरवी का खेल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई नेता बधाई देने के साथ-साथ अपनी नियुक्ति की पैरवी भी कर रहे हैं। कोई संगठन में अपनी निष्ठा गिना रहा है, तो कोई चुनावी दौर की मेहनत याद दिला रहा है। कुछ तो अधिकारियों से यह कहते भी नजर आए कि “ऊपर से इशारा मिलते ही फाइल आगे बढ़ा दी जाए।”
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अधिकारियों की भी बढ़ी व्यस्तता
नियुक्तियों की संभावनाओं को देखते हुए सचिवालय में अधिकारियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। बधाई स्वीकार करते हुए अधिकारी यही जवाब देते नजर आ रहे हैं कि जैसे ही मुख्यमंत्री या मंत्रियों की ओर से निर्देश मिलेंगे, नियुक्तियों से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया जाएगा।
अब भी करीब 18 पद हैं खाली
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के निगमों, बोर्डों और परिषदों में अब भी करीब 18 पद रिक्त हैं। इन्हीं पदों को भरने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि सरकार संगठन को मजबूत करने और संतुलन साधने के लिए जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियां कर सकती है।
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कांग्रेस संगठन में नई जान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम–बोर्डों की नियुक्तियां कांग्रेस संगठन को दोबारा सक्रिय करने का माध्यम बन सकती हैं। लंबे समय से पद और जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं को अगर ताजपोशी मिलती है, तो इसका सीधा असर संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।
नए साल में नए चेहरे, यही उम्मीद
नए साल के साथ कांग्रेस खेमे में यह उम्मीद जोर पकड़ रही है कि शिमला से जल्द ताजपोशी की सूची सामने आएगी। इसी उम्मीद में नेता राजधानी की दौड़ लगा रहे हैं और हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर कुर्सी की राजनीति खुलकर सामने आ गई है।
