शिमला। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में बदलाव और योजना को कमजोर किए जाने को लेकर हिमाचल कांग्रेस मुखर हो गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष अनशन पर बैठ गए हैं। इस अनशन के जरिए केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ राजनीतिक और वैचारिक विरोध दर्ज कराया जाएगा।

सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार पर लगाया आरोप

सीएम सुक्खू ने कहा कि मनरेगा गरीब और ग्रामीण जनता की जीवनरेखा है, इससे गांधी जी का नाम हटाना कांग्रेस को स्वीकार नहीं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जानबूझकर मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसकी मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

 

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उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। ऐसे में इसके नाम और दायरे से छेड़छाड़ को कांग्रेस किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगी।

अनशन में यह होंगे शामिल

अनशन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, मंत्रिमंडल के सभी सदस्य, कांग्रेस विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पीसीसी के पूर्व पदाधिकारी, बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, अग्रणी संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह आंदोलन केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे मजबूती से उठाया जाएगा।

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देशभर में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मनरेगा के मुद्दे पर संगठनात्मक, जनांदोलनात्मक और वैधानिक, तीनों स्तरों पर संघर्ष किया जाएगा। इसके तहत पंचायत स्तर तक लोगों को जागरूक किया जाएगा और जनमत के जरिए केंद्र सरकार के फैसले की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जाएगी।

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वहीं, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के हालिया फैसले के तहत 5 जनवरी से देशभर में ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ भी शुरू किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस इस अभियान को हिमाचल में प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी में जुटी है।

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