सोलन। हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भी प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह महसूस होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। उनकी इस टिप्पणी से प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है।

विपक्ष के आरोप, राज्यपाल की प्रतिक्रिया

सोलन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान राज्यपाल ने बताया कि विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि वह सरकार से जानना चाहेंगे कि कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

 

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राज्यपाल का मानना है कि हिमाचल एक छोटा राज्य है और यहां कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होना सही नहीं है। खासकर, पंजाब में हिमाचल की बसों पर हो रहे हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि पर्यटकों की गाड़ियों और बसों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है।

बढ़ते नशे पर गहरी चिंता

राज्यपाल ने हिमाचल में बढ़ते नशे की समस्या को भी गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के लोग इस समस्या के खिलाफ जागरूक हो रहे हैं और गांव-गांव में इसके खिलाफ आवाज उठ रही है।

 

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पहले ऐसा माहौल नहीं था, लेकिन अब लोग समझ चुके हैं कि नशा युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने बताया कि नशे के खिलाफ चलाए गए अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब पंचायत स्तर से भी नशे के खिलाफ आंदोलन शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के हर नागरिक को सैनिक की तरह आगे आकर इस समस्या के खिलाफ लड़ना होगा।

नशे का असर सेना भर्ती पर

राज्यपाल ने चिंता जताई कि नशे की वजह से युवा पीढ़ी कमजोर हो रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड के युवा सेना में भर्ती होने के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

 

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पंजाब में स्थिति यह हो गई है कि सेना की भर्ती में शामिल होने वाले कई युवा निर्धारित शारीरिक और मानसिक मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि हिमाचल में ऐसी स्थिति न बनने पाए, इसके लिए नशे को पूरी तरह जड़ से मिटाने की जरूरत है।

समाधान की जरूरत

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को नशे और बिगड़ती कानून व्यवस्था से बचाने के लिए सरकार, प्रशासन और जनता को मिलकर प्रयास करने होंगे। कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, वहीं नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को और तेज करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि, अगर सभी नागरिक मिलकर इस दिशा में कार्य करें तो हिमाचल को नशामुक्त और सुरक्षित राज्य बनाया जा सकता है।

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