शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सदन इस बार नशे के मुद्दे पर गर्माएगा। विपक्षी दल भाजपा ने इस सत्र में चिट्टा तस्करी और नशे की बढ़ती समस्या को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछने की तैयारी कर ली है। हिमाचल में युवाओं के बीच नशे की लत एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इसे लेकर भाजपा विधायक जवाब मांगेंगे।

विधानसभा में नशे का मुद्दा गरमाएगा

इस बार विधानसभा सचिवालय में अब तक कुल 963 प्रश्न दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से 50 से अधिक प्रश्न नशे और चिट्टा तस्करी से संबंधित हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्य में नशे के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में असफल साबित हो रही है।

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वहीं, राज्य सरकार का दावा है कि वह नशे के खिलाफ पूरी तरह सख्त है और चिट्टा तस्करों पर लगाम लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी नशा तस्करों से सांठगांठ के आरोप लगे हैं, जिसके चलते सरकार ने इस मामले में भी सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

नहीं थम रही सप्लाई

प्रदेश सरकार ने चिट्टा तस्करों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों के घरों में भी छापेमारी की है ताकि किसी भी तरह की मिलीभगत का पता लगाया जा सके।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष अब तक 500 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई जेलों में पहले से ही तस्करों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन इसके बावजूद राज्य में चिट्टा तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।

बॉर्डर सील करने की मांग

भाजपा विधायकों का कहना है कि जब तक हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों को पूरी तरह सील नहीं किया जाता, तब तक नशे की समस्या से छुटकारा पाना मुश्किल होगा। पंजाब और अन्य राज्यों से चोर रास्तों के जरिए चिट्टा हिमाचल में पहुंच रहा है, जिस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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प्रदेश पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के लिए पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत अंतरराज्यीय सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, वाहनों की चेकिंग बढ़ाई गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

क्या सरकार सख्त कदम उठाएगी?

अब देखना यह होगा कि सरकार इस विधानसभा सत्र में विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है और क्या नशे के खिलाफ कोई ठोस रणनीति पेश की जाती है। विपक्ष का कहना है कि केवल गिरफ्तारियां और छापेमारी काफी नहीं हैं, बल्कि नशे की जड़ तक पहुंचने और इसे खत्म करने के लिए बड़े स्तर पर नीति बनाने की जरूरत है।

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