कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कांगड़ा जिले के टांडा अस्पताल के डॉक्टरों ने इतिहास रच दिया है। दरअसल, अस्पताल में पहली बार रोबोटिक तकनीक के जरिए जटिल व्हिपल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है।
हिमाचल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास
डॉक्टरों ने ऐसी सर्जरी कर चंबा की 62 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया। महिला पित्त की नली में कैंसर से जूझ रही थी। मगर अब वो पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे घर भेज दिया गया है।
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महिला को था कैंसर
जानकारी के अनुसार, चंबा निवासी महिला को करीब दो महीने पहले लगातार पेट दर्द की शिकायत होने लगी थी। इसके साथ ही उसे पीलिया के लक्षण भी दिखाई देने लगे। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे टांडा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच की। जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि महिला की पित्त की नली में कैंसर है, जो एक जटिल और गंभीर स्थिति मानी जाती है।
पहली बार की गई रोबोटिक सर्जरी
मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने पारंपरिक ओपन सर्जरी की बजाय रोबोटिक व्हिपल प्रक्रिया (पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टामी) अपनाने का निर्णय लिया। यह सर्जरी बहुत मुश्किल मानी जाती है, जिसमें अग्नाशय, पित्त की नली और छोटी आंत के हिस्से पर काम किया जाता है।
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9 घंटे चला ऑपरेशन
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को डा. अंकित शुक्ला के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। उनके साथ सर्जन डा. मुकेश और अन्य विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही। ऑपरेशन करीब 9 घंटे तक चला, जिसमें हर चरण पर सटीकता और सावधानी की जरूरत थी।
महिला की हुई सफल सर्जरी
एनेस्थीसिया टीम ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। डा. श्याम भंडारी और डा. भानु गुप्ता ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। तकनीकी रूप से कठिन होने के बावजूद ऑपरेशन बिना किसी बड़ी जटिलता के सफल रहा।
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10 दिन में अस्पताल से घर
सर्जरी के बाद महिला की हालत में लगातार सुधार देखा गया। जहां सामान्य ओपन सर्जरी में मरीज को कई हफ्तों तक अस्पताल में रहना पड़ता है, वहीं इस आधुनिक तकनीक के चलते महिला को सिर्फ 10 दिनों में ही छुट्टी दे दी गई। यह इस तकनीक की सफलता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
क्यों खास है रोबोटिक व्हिपल सर्जरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, पित्त की नली अग्नाशय से जुड़ी होती है और छोटी आंत में खुलती है। इस क्षेत्र में कैंसर होने पर व्हिपल सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है, जो पहले केवल ओपन सर्जरी के जरिए की जाती थी। लेकिन रोबोटिक तकनीक आने से यह प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी हो गई है
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लगाए जाते हैं छोटे-छोटे चीरे
इस तकनीक में छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे-
- रक्तस्राव कम होता है
- संक्रमण का खतरा घटता है
- दर्द कम होता है
- मरीज तेजी से रिकवर करता है
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
डा. अंकित शुक्ला के अनुसार, पारंपरिक ओपन सर्जरी में मरीज को अधिक दर्द और लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है। जबकि रोबोटिक सर्जरी में ये समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। यह तकनीक भविष्य में जटिल कैंसर सर्जरी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
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नहीं जाना पड़ेगा हिमाचल से बाहर
कॉलेज के प्राचार्य डा. मिलाप शर्मा ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता न केवल अस्पताल बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। इससे अब क्षेत्र के मरीजों को जटिल इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
उम्मीद की नई किरण
टांडा मेडिकल कॉलेज में इस तरह की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होने से अब प्रदेश के लोगों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा। यह उपलब्धि खासतौर पर उन मरीजों के लिए राहत लेकर आई है, जिन्हें पहले इलाज के लिए दूरदराज के बड़े मेडिकल संस्थानों में जाना पड़ता था।
