राजनीति

#विविध

August 5, 2026

हिमाचल : बहू ने सास को निकाला घर से बाहर, प्रॉपर्टी पर बताया अपना हक- HC ने दिया झटका

बहू ने अदालत में कहा- मैं उस घर की मालकिन

Add

News4himachal

as a

Trusted Source on

Google

शेयर करें:

daughter in law mother family dispute property rights highcourt decision shimla hp

शिमला। घरेलू विवादों और संपत्ति से जुड़े मामलों में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम कानूनी स्पष्टता दी है। अदालत ने कहा है कि यदि सास और बहू एक ही घर में घरेलू संबंध के तहत साथ रह चुकी हैं- तो सिर्फ इस आधार पर सास को घर से नहीं निकाला जा सकता कि मकान बहू के नाम पर है। साझा गृहस्थी का अधिकार संपत्ति के मालिकाना हक से अलग कानूनी संरक्षण प्राप्त करता है।

बहू सास को नहीं निकाल सकती घर से बाहर

हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि साझा गृहस्थी में रह रही सास को केवल इसलिए बेदखल नहीं किया जा सकता क्योंकि मकान बहू के नाम पर दर्ज है। अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू संबंध और साझा निवास का अधिकार संपत्ति के स्वामित्व से अलग कानूनी विषय है।

यह भी पढ़ें- मणिमहेश यात्रा करने जा रहे थे चार दोस्त : थार पर पहाड़ी से गिरी बड़ी चट्टान, एक की मौ**त

हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका

न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की अदालत ने सुरभि बेदी बनाम मनजीत कौर मामले में बहू द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। साथ ही निचली अदालत और अपीलीय अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सास को साझा घर में रहने का अधिकार बहाल किया गया था।

क्या है मामला?

मामला मंडी जिले का है। रिकॉर्ड के अनुसार, सास के बेटे का विवाह वर्ष 2013 में हुआ था। शादी के बाद पूरा परिवार कुछ समय तक किराये के मकान में रहा। बाद में सितंबर 2024 में परिवार बहू के नाम पर बने नए मकान में रहने लगा।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में मानसून से बिगड़े हालात, 160 सड़कें बंद- अगले 6 दिन भारी बारिश का अलर्ट

सास का आरोप था कि नवंबर 2025 में बहू ने विवाद के बाद एक किराएदार रख लिया और उन्हें घर से बाहर कर दिया। इसके बाद उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अदालत में सुरक्षा, संरक्षण और निवास के अधिकार की मांग करते हुए याचिका दायर की।

बहू बोली- मैं उस घर की मालकिन

बहू की ओर से अदालत में कहा गया कि मकान उसकी निजी आय से बनाया गया है और वह उसकी एकमात्र मालिक है। इसलिए सास का उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं बनता और वह घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत पाने की पात्र नहीं हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल पुलिस के ईमानदार सिपाही- अपराधियों पर कसते रहे शिकंजा, महकमे ने अवॉर्ड से नवाजा

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने बहू की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला घरेलू संबंध के तहत किसी घर में रह चुकी है, तो वह घर साझा गृहस्थी की श्रेणी में आ सकता है, चाहे उसका मालिक कोई भी हो।

 

अदालत ने यह भी कहा कि जब बहू स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि सास-ससुर उसी मकान में उसके साथ रहते थे, तो दोनों के बीच घरेलू संबंध स्थापित हो जाता है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति को किराएदार बनाकर सास को अप्रत्यक्ष रूप से घर से बाहर करना कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : रातभर परिवार करता रहा इंतजार, सुबह खाई में मिली कार; अंदर पड़ी थी पटवारी की देह

अदालत का संदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि साझा गृहस्थी का अधिकार केवल संपत्ति के नाम से तय नहीं होता, बल्कि पारिवारिक संबंधों और साथ रहने की वास्तविक स्थिति को भी कानूनी महत्व दिया जाता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़

LAUGH CLUB

संबंधित आलेख