शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही थमने का नाम नहीं ले रही। बीती रात से ही प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश हो रही है। हालांकि, मौसम विभाग ने आज के लिए पूरे प्रदेश में धूप खिलने का अनुमान जताया था, लेकिन शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और सोलन समेत कई जिलों में सुबह से ही बारिश जारी है।
तीन दिन का यलो अलर्ट
मौसम विभाग ने कल से आगामी तीन दिनों तक पूरे प्रदेश में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों और प्रशासन को सचेत रहने की हिदायत दी है क्योंकि बारिश से भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदियों-नालों में जलस्तर बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
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मौत का आंकड़ा 380 पर पहुंचा
इस मानसून सीजन (1 जून से 10 सितंबर) तक अब तक 380 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 76 लोग बाढ़, बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी सीधी आपदाओं के शिकार हुए। 40 लोग अब भी लापता हैं और प्रशासन का कहना है कि उनके जीवित मिलने की संभावना बेहद कम है।
प्राकृतिक आपदाओं की मार
- बड़े लैंडस्लाइड की 137 घटनाएं दर्ज हुईं।
- 97 बार फ्लैश फ्लड ने तबाही मचाई।
- 45 बार बादल फटने की घटनाओं ने गांवों और कस्बों को उजाड़ा।
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हिमाचल की बदली तस्वीर
इन घटनाओं ने हिमाचल की तस्वीर बदल कर रख दी है। सैकड़ों घर जमींदोज हो गए, पुल बह गए और लोग अपने परिवारों से बिछड़ गए। अब तक 4306 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान हो चुका है।
सड़कें बनी चुनौती
प्रदेश भर में 4 नेशनल हाईवे समेत 582 सड़कें बंद हैं- इनमें कई सड़कें पिछले 15 दिनों से पूरी तरह अवरुद्ध हैं। पहाड़ी जिलों में सड़कें बह जाने या पहाड़ से मलबा गिरने के कारण ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूट गया है। राहत व बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार बारिश के चलते मशीनरी को काम करने में दिक्कत हो रही है।
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प्रशासन की चिंता
बार-बार हो रही बारिश से राहत और पुनर्वास कार्य धीमे हो गए हैं। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में लोग अब भी मोबाइल नेटवर्क और बिजली की कमी से जूझ रहे हैं।
