शिमला। हिमाचल प्रदेश एक तरफ लगातार बढ़ते कर्ज और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बोर्डों और निगमों में तैनात चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सुविधाओं में इजाफा किया गया है। सुक्खू सरकार ने इन पदाधिकारियों का दैनिक भत्ता तीन गुना बढ़ाकर 400 रुपये से सीधे 1,200 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लगातार प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने और सरकारी खर्च कम करने की बात कहते रहे हैं। ऐसे में बोर्डों और निगमों के चेयरमैन-वाइस चेयरमैन के भत्ते में तीन गुना बढ़ोतरी ने सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बढ़ते कर्ज के बीच बढ़ा दिए पदाधिकारियों के भत्ते
हिमाचल पहले से ही भारी कर्ज और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए भी चरणबद्ध तरीके से भुगतान कर रही है। ऐसे माहौल में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के दैनिक भत्ते में 200 फीसदी की बढ़ोतरी चर्चा का विषय बन गई है। पहले राज्य से बाहर आधिकारिक यात्रा के दौरान इन पदाधिकारियों को 400 रुपये प्रतिदिन दैनिक भत्ता मिलता था। अब यही राशि बढ़ाकर 1,200 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। यानी पहले के मुकाबले हर दिन 800 रुपये अधिक मिलेंगे।
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सरकार फिजूलखर्ची रोकने की बात करती है, यहां सुविधाओं में इजाफा
मुख्यमंत्री सुक्खू कई मौकों पर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए खर्चों को नियंत्रित करने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। सरकार की ओर से विभागों में अनावश्यक खर्च कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की बात कही जाती रही है। लेकिन दूसरी ओर बोर्डों और निगमों के राजनीतिक पदाधिकारियों की सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यही विरोधाभास अब विपक्ष और आम लोगों के बीच चर्चा का कारण बन सकता है कि जब प्रदेश आर्थिक संकट में है तो खर्च कम करने की नीति का असर सबसे पहले किन क्षेत्रों पर होना चाहिए?
पहले मानदेय 30 हजार से 80 हजार किया था
चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए सुविधाओं में बढ़ोतरी का यह पहला फैसला नहीं है। जुलाई 2025 में सरकार ने बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों तथा उपाध्यक्षों के मासिक मानदेय में बड़ी वृद्धि की थी। तब मासिक मानदेय को 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये किया गया था। इसके साथ ही 25 हजार रुपये एचआरए, 3,500 रुपये सत्कार भत्ता, 2,500 रुपये वाहन भत्ता और 900 रुपये टेलीफोन भत्ता भी निर्धारित किया गया था। अब दैनिक भत्ते में तीन गुना बढ़ोतरी के बाद इन पदों से जुड़ी वित्तीय सुविधाओं में एक और इजाफा हो गया है।
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राज्य से बाहर यात्रा पर मिलेगा बढ़ा हुआ भत्ता
वित्त विभाग की अधिसूचना के मुताबिक 1,200 रुपये का संशोधित दैनिक भत्ता राज्य से बाहर आधिकारिक यात्रा के दौरान लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले जारी अधिसूचनाओं में निर्धारित अन्य नियम और शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। इस संबंध में अधिसूचना की प्रतियां सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) और महालेखाकार (ऑडिट) को भेज दी गई हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
पौने चार साल में 25 से ज्यादा बोर्ड-निगमों में नियुक्तियां
मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक 25 से अधिक बोर्डों और निगमों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन समेत राजनीतिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। ऐसे में इन पदाधिकारियों की संख्या को देखते हुए दैनिक भत्ते में बढ़ोतरी का वित्तीय असर भी सरकार के खजाने पर पड़ेगा। यही वजह है कि आर्थिक संकट के दौर में इस फैसले को केवल भत्ते में सामान्य संशोधन के तौर पर नहीं, बल्कि सरकार की खर्च संबंधी प्राथमिकताओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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कर्मचारियों-पेंशनर्स के भुगतान के बीच बढ़ोतरी पर उठे सवाल
प्रदेश में एक तरफ कर्मचारी और पेंशनर्स अपने लंबित डीए और एरियर के भुगतान का इंतजार करते रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार को आर्थिक संसाधनों की कमी का हवाला देकर वित्तीय देनदारियों को चरणबद्ध तरीके से निपटाना पड़ रहा है। ऐसे समय में राजनीतिक नियुक्तियों पर होने वाले खर्च और उनके भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि आर्थिक संकट में सरकार का खर्च कम करने का दावा आखिर राजनीतिक पदों की सुविधाओं तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
