कांगड़ा। देवभूमि हिमाचल के मंदिरों और शक्तिपीठों से प्रदेश के साथ-साथ देश-विदेश के लोगों की भी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यहां के मंदिरों में स्थानीय और बाहरी राज्यों के लोगों की भीड़ देखने को मिलती है। इन मंदिरों में कई भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वो भेंट स्वरूप मंदिरों में कई तरह की कीमती चीजें चढ़ाते हैं।
श्रद्धालु ने चढ़ाया सोने का मांग टीका
ऐसा ही श्रद्धा और आस्था का अनूठा दृश्य कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला माता मंदिर में देखने को मिला। जिसके बाद शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर एक बार फिर भव्य भेंट से सुर्खियों में आ गया है। श्री ज्वालामुखी मंदिर के दरबार में एक श्रद्धालु ने 13 ग्राम सोने का मांग टीका भेंट किया है।
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परिवार संग आया था श्रद्धालु
मंदिर प्रशासन ने बताया कि आज श्रद्धालु अपने परिवार संग पंजाब से मंदिर पहुंचा था। उसने माता के दरबार में सोने का सुंदर मांग टीका अर्पित किया। श्रद्धालु द्वारा भेंट किया गया ये टीका कारीगिरी का उत्कृष्ट नमूना है। यह टीका शुद्ध सोने से तैयार किया गया है और इस पर बहुत ही सुंदर बारीक कारीगरी की गई है।
हर मनोकामना हुई पूरी
वहीं, माता के दरबार में छत्र भेंट करने वाले श्रद्धालु का कहना है कि वो और उनका परिवार कई साल से माता ज्वालाजी की सेवा कर रहे हैं। आज तक उन्होंने माता रानी से जो भी प्रार्थना की- वो सब पूरी हुई हैं। इस बार भी उन्होंने माता रानी से एक विशेष मनोकामना मांगी थी- जिसे माता रानी ने पूरा किया। इसी के चलते वो अपने परिवार संग माता को भेंट करने आए।
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परिवार में सुख-शांति और खुशहाली
श्रद्धालु ने कहा कि माता के चरणों में ये मांग टीका भेंट करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। श्रद्धालु ने कहा कि माता ज्वालाजी के आशीर्वाद से उनके घर-परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी हुई है।
देवी की नहीं कोई मूर्ती
आपको बता दें कि श्री ज्वालाजी मंदिर कांगड़ा जिले में स्थित भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्ति मंदिरों में से एक है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है। इस मंदिर में प्राकृतिक रूप से प्रज्वलित होने वाली दिव्य ज्योतियों की पूजा की जाती है।
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ज्वालाजी की धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। संसार की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। जिस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी, वहां ज्वालाजी शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
