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August 4, 2026
हिमाचल को मोदी सरकार की सौगात: 3 हजार करोड़ की मदद मंजूर; चेतावनी के साथ पहली किस्त जारी
केंद्र ने ब्याजमुक्त ऋण सहायता की स्वीकृत, आर्थिक चुनौतियों के बीच हिमाचल को मिलेगी राहत
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शिमला। राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और आर्थिक तंगी के दौर के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल को एक बड़ी राहत भरी सौगात दी है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की विशाल धनराशि को हरी झंडी दिखा दी है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने पूंजी निवेश की 403.92 करोड़ रुपये की पहली किस्त तत्काल प्रभाव से जारी कर दी है। हालांकि केंद्र ने साफ कर दिया है कि इस राशि के उपयोग में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है।
दरअसल केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 3,049.20 करोड़ रुपये की 50 वर्ष की ब्याजमुक्त ऋण सहायता स्वीकृत की है। यह राशि चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी। इस विशेष पैकेज का उद्देश्य प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना और विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को पूंजी निवेश के उद्देश्य से दी जाने वाली विशेष सहायता योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को 403.92 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। व्यय विभाग से मंजूरी मिलने के बाद यह राशि राज्य सरकार को जारी कर दी गई है, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
इस वित्तीय सहायता का उपयोग मुख्य रूप से सड़क निर्माण, पुलों, जलशक्ति योजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर किया जाएगा। लंबे समय से लंबित कई परियोजनाओं को अब वित्तीय मजबूती मिलने से उनके पूरा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
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मोदी सरकार ने इस फंड के उपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। राज्य सरकार को यह राशि सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) खाते के माध्यम से 10 कार्य दिवसों के भीतर संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों तक पहुंचानी होगी। किसी भी स्थिति में यह प्रक्रिया 30 दिनों से अधिक नहीं चल सकती।
यदि निर्धारित 30 दिनों के भीतर राशि संबंधित एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई गई तो राज्य सरकार को विलंब अवधि का ब्याज केंद्र सरकार को चुकाना होगा। इतना ही नहीं, एसएनए खाते में जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी केंद्र सरकार को वापस करना होगा।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परियोजनाओं के लिए जारी धनराशि को किसी भी खाते में रोककर रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा। अंतिम लाभार्थी तक भुगतान पहुंचने के बाद ही खर्च माना जाएगा। केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि पूरी राशि का उपयोग 31 मार्च 2027 से पहले अनिवार्य रूप से किया जाए।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन परियोजनाओं के लिए यह राशि स्वीकृत की गई है, उनमें पूर्व अनुमति के बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो भविष्य की वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है और केंद्रीय करों में मिलने वाले राज्य के हिस्से से भी कटौती की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस राशि का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग किया गया तो हिमाचल प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। केंद्र से मिली यह आर्थिक सहायता ऐसे समय आई है, जब प्रदेश वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में यह पैकेज हिमाचल के विकास को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है।