सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की पवित्र तीर्थनगरी श्री रेणुका जी में वह क्षण एक बार फिर लौट आया है, जिसका इंतज़ार पूरे साल भक्त करते हैं। आज शुक्रवार को भगवान परशुराम अपनी माता रेणुका जी से मिलने आ रहे हैं। इसी शुभ अवसर पर यहां छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेला आरंभ हो गया है, जो 5 नवंबर तक चलेगा।
आज होगा मिलन
यह मेला हिमाचल प्रदेश की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक है। हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी से पूर्णिमा तक यह मेला आयोजित होता है। जनश्रुति के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम जामूकोटी से अपनी मां रेणुका जी से मिलने आते हैं। इस दिव्य मिलन के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु सिरमौर पहुंचते हैं।
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आस्था और वात्सल्य का संगम
यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मां के वात्सल्य और पुत्र की श्रद्धा का अनूठा प्रतीक है। नारी देह के आकार की झील, जिसे मां रेणुका जी का स्वरूप माना जाता है, इस पूरे पर्व का केंद्र है। इसी झील के किनारे स्थित है मां रेणुका और भगवान परशुराम का भव्य मंदिर। आसपास के कई ग्राम देवता अपनी-अपनी पालकियों में सुसज्जित होकर इस मिलन का साक्षी बनने आते हैं।
इन राज्य से पहुंचते हैं भक्त
छह दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान, हवन, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से वातावरण भक्तिमय बना रहेगा। हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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ये है पौराणिक कथा
कथाओं के अनुसार, महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र भगवान परशुराम ने जब अपनी माता के वचन और पिता की आज्ञा का पालन किया, तो यह स्थान उनकी भक्ति का प्रतीक बन गया। मां रेणुका ने वचन दिया था कि वह हर वर्ष कार्तिक शुक्ल दशमी को अपने पुत्र से मिलने आएंगी। तब से यह परंपरा अनवरत चली आ रही है।
