शिमला। हिमाचल की राजधानी शिमला में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब पंजाब विजिलेंस की टीम शिमला पहुंची। पंजाब विजिलेंस की टीम आय से अधिक संपत्ति मामले में आरोपित शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को भी साथ लेकर आई थी। विजिलेंस की टीम मजीठिया को शिमला के मशोबरा क्षेत्र में लेकर गई थी। जहां मौके पर जाकर संपत्तियों की तस्दीक की गई।

 

इसके बाद विजिलेंस बिक्रम मजीठिया को सोलन के बद्दी में भी लेकर गई थी। बताया जा रहा है कि बिक्रम सिंह मजीठिया की प्रापर्टी शिमला के मशोबरा और बद्दी में भी है। जिसकी जांच के लिए ही पंजाब विजिलेंस की टीम मजीठिया को लेकर हिमाचल लेकरआई है।

 

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आय से अधिक संपत्ति की चल रही जांच

बता दें कि शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर शिकंजा कसता जा रहा है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मजीठिया के खिलाफ जांच की रफ्तार तेज कर दी है। मजीठिया को फिलहाल सात दिन के रिमांड पर भेजा गया है और 2 जुलाई को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।

हिमाचल में मशोबरा और बद्दी तक पहुंची जांच

30 जून को विजिलेंस टीम मजीठिया को शिमला के मशोबरा क्षेत्र लेकर पहुंची, जहां उनकी संपत्तियों की भौतिक जांच की गई। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार मजीठिया को बद्दी भी ले जाया गया और उन्हें उत्तर प्रदेश ले जाने की तैयारी भी की जा रही है। इससे पहले रविवार को मजीठिया के पूर्व पीए तलबीर सिंह गिल और बौनी अजनाला के बयान भी दर्ज किए गए थे।

 

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540 करोड़ की संपत्ति पर सवाल

जांच एजेंसियों के अनुसार मजीठिया ने 540 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की है। उनके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान विजिलेंस ने 29 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, 3 आईपैड, 2 डेस्कटॉप, 8 डायरियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। विजिलेंस के अनुसार मजीठिया द्वारा नियंत्रित कंपनियों के बैंक खातों में 161 करोड़ की बेहिसाब नकदी जमा है, जबकि 141 करोड़ रुपए का लेन.देन संदिग्ध विदेशी संस्थाओं से हुआ है। 236 करोड़ रुपए की राशि कंपनियों के वित्तीय विवरण में बिना किसी स्पष्टता के दर्ज है।

 

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कारोबारी और पूर्व अधिकारी भी जांच के घेरे में

इस केस में अब तक चार प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जिनमें ईडी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह और पंजाब के पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय शामिल हैं। सोमवार को कारोबारी बिट्टू औलख और जगजीत सिंह चाहल मोहाली स्थित विजिलेंस मुख्यालय में पूछताछ के लिए पेश हुए। दोनों पर ड्रग तस्करी और मजीठिया के करीबी होने के आरोप हैं।

 

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बयान देने के बाद दोनों ने कहा कि अगर हम दोषी हैं तो हमें फांसी पर लटका दिया जाए, लेकिन हमने नशे से कोई पैसा नहीं कमाया। हम पहले भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हरदयाल सिंह मान से भी पूछताछ होनी चाहिए।

मजीठिया पर कार्रवाई राजनीति से प्रेरित

मजीठिया को 25 जून की सुबह उनके अमृतसर स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। उनका दावा है कि 24 जून की रात 10:30 बजे रिपोर्ट विजिलेंस को सौंपी गई थी और अगले दिन तड़के 4:30 बजे केस दर्ज कर गिरफ्तारी कर ली गई। मजीठिया के वकील अर्शदीप सिंह कलेर का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक है क्योंकि मजीठिया सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालत में अलग.अलग बातें कह रही है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने इस मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बता रही है।

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