#विविध
April 8, 2026
हिमाचल में 107 साल के मास्टर जी: इस उम्र में खुद करते हैं अपना सारा काम, सेहत का राज जान होंगे दंग
107 साल की उम्र में मिसाल बने मास्टर तारा सिंह
शेयर करें:

चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के एक मास्टर जी उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां अधिकांश लोग पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। हटनाला मोहल्ले में रहने वाले मास्टर प्यार सिंह 107 वर्ष के हैं। मगर इस उम्र में भी उनका हौसला, दिनचर्या और आत्मनिर्भरता लोगों को हैरान कर देती है।
5 अप्रैल 1919 को जन्मे प्यार सिंह आज भी एक सादगी भरा और अनुशासित जीवन जी रहे हैं- जो नई पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। मास्टर प्यार सिंह ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र को समर्पित किया।
मास्टर जी गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंबा में क्राफ्ट (कारपेंटर ट्रेड) के शिक्षक रहे। इसके साथ ही वे उर्दू भाषा का भी ज्ञान विद्यार्थियों को देते थे। उनके पढ़ाने का अंदाज इतना सहज और व्यावहारिक था कि छात्र आज भी उन्हें याद करते हैं।
31 मार्च, 1979 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका सीखने और सिखाने का जज्बा कभी कम नहीं हुआ। उनका छात्र जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक रहा। वे पढ़ाई में बेहद मेधावी थे, खासकर गणित में उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी।
गणित में प्रथम स्थान हासिल करने पर उस समय के चम्बा रियासत के राजा शाम सिंह ने उन्हें सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके जीवन के सबसे गर्वपूर्ण पलों में से एक है, जिसे वे आज भी बड़े गर्व से याद करते हैं। वे बताते हैं कि 1927 में उन्हें यह सम्मान मिला था और उस दौर की कई यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं।

प्यार सिंह सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी काफी रुचि रखते थे। वे बताते हैं कि उस समय ऐतिहासिक चौगान मैदान में अंग्रेज क्रिकेट खेलने आते थे। मंडी से भी टीमें मुकाबला खेलने पहुंचती थीं और उस दौर के राजा-महाराजा भी इन मैचों का हिस्सा बनते थे। इन घटनाओं को याद करते हुए उनकी आंखों में आज भी चमक आ जाती है।
अगर उनकी लंबी उम्र और अच्छी सेहत का राज पूछा जाए, तो वे बहुत सरल शब्दों में जवाब देते हैं- सादा जीवन और नियमित दिनचर्या। वे बताते हैं कि वे जीवन भर सुबह चार बजे उठते रहे हैं और आज भी जल्दी उठने की आदत नहीं छोड़ी। सुबह-शाम की सैर को वे सबसे जरूरी मानते हैं। पहले वे रोज चौगान मैदान में अपने दोस्तों के साथ टहलते थे, जबकि अब अपने मोहल्ले में ही थोड़ी बहुत सैर कर लेते हैं।
सबसे खास बात यह है कि 107 साल की उम्र में भी वे काफी हद तक आत्मनिर्भर हैं। अपने रोजमर्रा के काम जैसे नहाना, कपड़े धोना और उन्हें सुखाना वे खुद ही करते हैं। कभी-कभी वे अपना खाना भी खुद बना लेते हैं। उनकी आंखों की रोशनी अभी भी ठीक है, हालांकि सुनने की क्षमता उम्र के साथ थोड़ी कम हो गई है।

उनका जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। करीब आठ साल पहले उनके बेटे का निधन हो गया, जो उनके लिए एक बड़ा आघात था। इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच बनाए रखी। आज वे अपनी बहू और पोते के साथ रहते हैं और परिवार के साथ सादगी से जीवन बिता रहे हैं।
मास्टर प्यार सिंह उन चुनिंदा लोगों में से हैं, जिन्होंने न सिर्फ आजाद भारत को देखा, बल्कि रियासतों के दौर को भी करीब से जिया है। उनके अनुभव इतिहास के जीवंत पन्नों की तरह हैं। उनकी सादगी, अनुशासन, मेहनत और आत्मनिर्भरता आज के समय में हर व्यक्ति के लिए एक सीख है।
उनका जीवन यह साफ संदेश देता है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। अगर मन मजबूत हो, दिनचर्या संतुलित हो और सोच सकारात्मक हो, तो इंसान हर उम्र में सक्रिय और खुशहाल जीवन जी सकता है।