शिमला। हिमाचल प्रदेश के पटवारी और कानूनगो पिछले कुछ दिनों से सामूहिक अवकाश पर हैं और अब अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने जा रहे हैं। इस हड़ताल के कारण राज्य में लाखों लोग परेशान हो रहे हैं, क्योंकि कई सरकारी सेवाएं ठप हो गई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को सर्टिफिकेट प्राप्त करने में परेशानी हो रही है।

हड़ताल का कारण

  • हिमाचल प्रदेश के पटवारी और कानूनगो राज्य सरकार द्वारा उन्हें स्टेट कैडर में शामिल करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी पदोन्नति और ट्रांसफर के नियम प्रभावित होंगे।
  •  कर्मचारी जिला कैडर के तहत काम करते थे, जहां वे केवल अपने जिले में ही ट्रांसफर हो सकते थे। लेकिन अब स्टेट कैडर में शामिल होने से वे राज्य के किसी भी स्थान पर ट्रांसफर हो सकते हैं, जो उन्हें स्वीकार नहीं है।

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सेवाओं पर असर

हड़ताल के कारण राजस्व विभाग द्वारा दी जाने वाली 39 प्रकार की सेवाएं ठप हो गई हैं। इसमें रजिस्ट्री, डिमार्केशन, इंतकाल, गिरदावरी, बैंक की केसीसी रिपोर्ट, विभिन्न सर्टिफिकेट (जैसे हिमाचली बोनोफाइड, इनकम प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र) शामिल हैं। इन सेवाओं के ठप होने से हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन छात्रों को, जिन्हें काउंसलिंग, एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रमाणपत्रों की आवश्यकता है।

सरकार का रुख

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे का समाधान निकालेगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को जो सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी ताकि उनकी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा में कोई बाधा न आए। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि हड़ताल के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और सरकार इस मामले में कर्मचारियों से बातचीत करने के लिए तैयार है।

 

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पहले भी कर चुके हड़ताल

यह पहली बार नहीं है जब पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर गए हैं। इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा इन्हें स्टेट कैडर में डालने का फैसला लिया गया था, तब भी उन्होंने एक सप्ताह से अधिक समय तक अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया था और बाद में हड़ताल को खत्म कर दिया था।

 

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कर्मचारियों की मांग

कर्मचारियों का मुख्य विरोध इस बात पर है कि स्टेट कैडर के तहत उनकी प्रमोशन और कार्यक्षेत्र की स्वायत्तता प्रभावित होगी। इसके अलावा, उनके पास जो कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं होनी चाहिए, वे भी उन्हें नहीं दी जा रही हैं, जिससे उनके कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है।

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