शिमला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत की कार्रवाई के जवाब में गुरुवार को शिमला समझौते को रद्द करने वाले पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो अपनी बेटी को उधार की साड़ी पहनाकर शिमला लाए थे।
शिमला का राजभवन आज भी उस ऐतिहासिक घटना और पाकिस्तान के तत्कालीन हालात का गवाह है। इस घटना का जिक्र जुल्फिकार की बेटी और पूर्व पीएम खुद बेनजीर भुट्टो ने अपनी जीवनी 'डॉटर ऑफ ईस्ट' में किया है। शिमला समझौता 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। उस समय इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं।
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बुआ से मांगे थे कपड़े
बेनजीर उस समय 18 साल की थीं। हॉवर्ड में पढ़ने वाली बेनजीर उन दिनों छुट्टी पर घर आई थीं। एक दिन पिता जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा कि भारत चलना है। विमान में पूरे समय वे बेटी को यही समझाते रहे कि कैसे उठना-बैठना और बोलना है। विदेश में पढ़ाई कर रही बेनजीर के पास उस समय सभी इन्फॉर्मल कपड़े थे। इसलिए उसने बुआ से मांगकर कुछ फॉर्मल ड्रेस पहनी थी।
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बेनजीर को घूरती रहीं इंदिरा
लेकिन पांच दिन के शिमला प्रवास के दौरान प्रेस और शिमला के लोगों की दिलचस्पी भुट्टो और इंदिरा गांधी के बीच हो रहे शिखर सम्मेलन से ज्यादा बेनजीर में थी। शिमला के मॉल रोड पर बेनजीर को देखकर भीड़ लग जाती। लोग फोटो खींचने लगते। यहां तक कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को भारत की ओर से दिए गए रात्रि भोज में भी इंदिरा गांधी बेनजीर को घूरती रहीं।
53 साल पुराने समझौते से मुंह मोड़ा
अब उसी शिमला समझौते से पाकिस्तान से मुंह मोड़ा है, जो कि बीते 53 साल से दोनों देशों के बीच रिश्तों का आधार रहा है। हालांकि, पाकिस्तान ने बिना वजह कभी उकसावे की कार्रवाई करके तो बीते 30 साल से आतंकवाद की फसल को पनपाकर इस रिश्ते को आखिर तोड़ दिया।
