शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच बड़ी प्रशासनिक कवायद शुरू होने जा रही है। राज्य में नई पंचायतों के गठन और वार्डों के डिलिमिटेशन के कारण अब 396 पंचायतों की मतदाता सूचियां नए सिरे से तैयार की जाएंगी।
दोबारा बनेगी मतदाता सूची
कई पंचायतों की सीमाओं में बदलाव होने से गांव और वार्ड एक पंचायत से दूसरी पंचायत में शामिल हो गए हैं, जिसके चलते पुरानी मतदाता सूचियों में संशोधन संभव नहीं रह गया है। ऐसे में प्रभावित पंचायतों में पूरी मतदाता सूची दोबारा बनाई जाएगी।
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136 नई पंचायतें बनी
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अब तक 136 नई पंचायतों का गठन किया जा चुका है, जबकि 62 नई पंचायतें और बनाए जाने की प्रक्रिया में हैं। इन नई पंचायतों के बनने और पुराने वार्डों के पुनर्संयोजन के कारण कई क्षेत्रों का प्रशासनिक ढांचा बदला है। इसी बदलाव के कारण मतदाताओं को सही पंचायत और सही वार्ड से जोड़ने के लिए मतदाता सूचियों का पुनः निर्माण जरूरी हो गया है।
कब बनेगी नई मतदाता सूची?
राज्य निर्वाचन आयोग 25 मार्च से इस पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करेगा। इसके लिए पंचायतीराज विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित पंचायतों के सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड समय पर निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराए जाएं। मतदाता सूची तैयार करते समय नई वार्ड सीमाओं के आधार पर मतदाताओं के नाम दर्ज किए जाएंगे, ताकि भविष्य में चुनाव के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
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कब होंगे पंचायत चुनाव?
इस बीच पंचायत चुनाव को लेकर समयसीमा भी तय हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाना अनिवार्य है। अदालत के आदेशों के मद्देनजर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियों को तेज कर दिया है।
31 मार्च को जारी होगा आरक्षण रोस्टर
सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 31 मार्च तक पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करें। रोस्टर जारी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
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दिशा-निर्देश जारी
चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगभग 36 हजार मतपेटियों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा मतदान केंद्रों की व्यवस्था, कर्मचारियों की तैनाती और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर भी जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जा सके। जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों को समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हुए कई बड़े बदलाव
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने बताया कि डिलिमिटेशन की प्रक्रिया के कारण कई पंचायतों के वार्डों की सीमाएं बदल गई हैं। कुछ वार्ड दूसरी पंचायतों में शामिल हो गए हैं, जबकि कई नए वार्ड भी बनाए गए हैं। ऐसे में मतदाताओं का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए मतदाता सूचियों को पूरी तरह नए सिरे से बनाना आवश्यक हो गया है।
12 दिन का समय दिया...
उन्होंने बताया कि नई मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद लोगों को अपने नाम जोड़ने या हटाने के लिए 12 दिनों का समय दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान पंचायत क्षेत्र के मतदाता दो रुपये का शुल्क देकर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकेंगे, जबकि शहरी निकायों के लिए यह शुल्क 50 रुपये निर्धारित किया गया है।
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शांतिपूर्ण ढंग से हो चुनाव
प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा- ताकि पंचायत चुनाव निर्धारित समयसीमा में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें। नई पंचायतों के गठन और वार्डों के पुनर्गठन के बाद यह प्रक्रिया ग्रामीण लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
