चंबा। करीब एक हजार साल पुराने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक चंबा शहर के लिए पहाड़ों से खतरे की तस्वीर अब पहले से कहीं ज्यादा साफ हो गई है। शहर में लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं के बाद कराए गए ड्रोन सर्वेक्षण में सात ऐसे स्थान सामने आए हैं, जिन्हें अति संवेदनशील माना गया है।

270 मकानों पर खतरा

इन इलाकों में रहने वाले करीब 270 मकानों पर भूस्खलन का खतरा बताया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में चौगान वार्ड शामिल है, जहां करीब 100 मकान खतरे की जद में हैं। प्रशासन और नगर परिषद अब इन संवेदनशील पहाड़ियों को सुरक्षित करने के लिए आधुनिक तकनीक के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की तैयारी में हैं।

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छह वार्डों में मकानों पर खतरा

तकनीकी सर्वेक्षण में चंबा शहर के छह वार्डों के अलग-अलग हिस्सों को जोखिम वाले क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया गया है। चौगान वार्ड में करीब 100 मकानों पर खतरा है। हटनाला और जनसाली क्षेत्र में लगभग 80 मकान इसकी चपेट में बताए गए हैं। सुल्तानपुर वार्ड के हेलीपैड और भट्टी नाला क्षेत्र में करीब 30 मकान जोखिम वाले दायरे में हैं। इसके अलावा हरदासपुरा के मुगला और कसाकड़ा क्षेत्र में करीब 60 मकानों पर भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

मुंबई से पहुंची विशेषज्ञ टीम

भूस्खलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर परिषद ने मुंबई से नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) के वरिष्ठ इंजीनियरों की टीम बुलाकर तकनीकी सर्वे करवाया।

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विशेषज्ञों ने नगर परिषद के अधिकारियों के साथ मिलकर ड्रोन के जरिए संवेदनशील पहाड़ियों और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान जमीन और पहाड़ियों की स्थिति, पहले हो चुके भूस्खलन, मकानों की स्थिति और भविष्य के संभावित जोखिमों का आकलन किया गया।

ड्रोन से हुआ सर्वे

ड्रोन सर्वे से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर अब सुरक्षा कार्यों की योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए डीपीआर बनाकर प्रदेश सरकार की मंजूरी के लिए भेजी जाएगी।

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इन सात इलाकों पर सबसे ज्यादा नजर

  • कसाकड़ा मोहल्ला: कैफे रोड के नीचे का हिस्सा बरसात में लगातार पत्थर गिरने की समस्या से प्रभावित रहता है। खतरा बढ़ने पर लोगों को रात के समय घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ता है।
  • चौगान वार्ड: चंबा गेस्टहाउस से उपायुक्त आवास तक का क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील है। बारिश के दौरान यहां रहने वाले परिवारों को कई बार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ता है।
  • पक्काटाला: पहाड़ी के एक हिस्से में कंक्रीट स्प्रे के जरिए सुरक्षा कार्य किया गया है, लेकिन दूसरा हिस्सा अभी भी संवेदनशील है। यहां स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस की गई है।
  • हटनाला-जनसाली: पहाड़ी के निचले हिस्से में लगातार जमीन खिसकने की समस्या सामने आई है। यहां कुछ मकानों पर सीधे खतरे की बात कही गई है।
  • सुल्तानपुर वार्ड: हेलीपैड और भट्टी नाला क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटनाएं होती रही हैं। स्थानीय स्तर पर अब तक कई हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें लोग घायल भी हुए हैं।
  • हरदासपुरा वार्ड: मुगला और रावी साइट की तरफ पहाड़ी का हिस्सा लगातार खिसकने से आसपास के मकानों पर खतरा बना हुआ है। ड्रोन सर्वे में इस हिस्से की जमीन और पहाड़ी की स्थिति का विशेष आकलन किया गया।
  • कसाकड़ा वार्ड: प्रभावित हिस्से में भूस्खलन और पत्थर गिरने की समस्या को देखते हुए इसे भी तकनीकी सर्वे में शामिल किया गया है। यहां भी स्थायी सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई गई है।

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अब DPR तय करेगी सुरक्षा का खाका

ड्रोन सर्वे के बाद अब प्रशासन के सामने इन सात अति संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित करने की चुनौती है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन स्थानों पर पहले सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएं। इन कार्यों में पहाड़ियों को स्थिर करने, भूस्खलन रोकने और प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

DPR तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी

नगर परिषद की कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल ने बताया कि ड्रोन सर्वे से संवेदनशील क्षेत्रों की सटीक मैपिंग करने में मदद मिली है। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर स्थायी सुरक्षा उपायों के लिए DPR तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी।

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क्या कहते हैं अधिकारी?

उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल के अनुसार, सर्वेक्षण से संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन करने में मदद मिली है। अब जोखिम के स्तर के आधार पर प्राथमिकता तय कर नियमानुसार विस्तृत डीपीआर तैयार की जाएगी और सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद स्थायी सुरक्षा कार्य किए जाएंगे।

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