बिलासपुर। वीरभूमि हिमाचल के बिलासपुर जिले का बेटा बलदेव चंद पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। शहीद बलदेव को उनके सात साल के मासूम बेटे मे मुखाग्नि दी। बलदेव की पत्नी ने लाल जोड़ा पहनकर सैल्यूट कर शहीद पति को अंतिम विदाई दी।
पंचतत्व में विलीन हुए शहीद बलदेव
शहीद की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। लोगों ने वीर जवान अमर रहे के नारों के साथ शहीद बलदेव चंद को अंतिम विदाई दी। बूढ़े मां-बाप की हालत और परिवार की बेबसी देखकर हर किसी की आंखें नम थीं।
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आतंकी मुठभेड़ में शहीद
आपको बता दें कि बलदेव चंद जम्मू-कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। बीते कल शहीद बलदेव की पार्थिव देह उनके पैृतक गांव पहुंची- जहां पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उधमपुर में शहीद हुए बलदेव
35 वर्षीय बलदेव चंद भारतीय सशस्त्र बल में लांस दफेदार थे। शुक्रवार रात जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान बलदेव चंद को गोली लग गई और वो शहीद हो गए। परिजनों को कल सुबह फोन पर बेटे की शहादत की खबर मिली।
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छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
बलदेव अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बलदेव के घर पर उनके माता-पिता, पत्नी शिवानी, सात साल का बेटा ईशान और एक छोटा भाई है। बलदेव की शहादत के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जबकि, पूरे इलाके में माहौल गमगीन बना हुआ है।
घर पहुंची पार्थिव देह
कल जैसे ही बलदेव की पार्थिव देह घर पहुंची तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। बलदेव को तिरंगे में लिपटा देख उनकी मां और पत्नी बेसुध हो गईं। जबकि, मासूम बेटा एक टक लगाए पिता को देखता रहा।
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2011 में हुए थे भर्ती
बताया जा रहा है कि बलदेव चंद साल 2011 में भारतीय सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। वर्तमान में बलदेव 4 राष्ट्रीय राइफल्स (बिहार) में लांस दफेदार के पद पर तैनात थे। 15 साल तक देश की सेवा करने के बाद शुक्रवार रात को वह आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।
जल्द छुट्टी आने का किया था वादा
शहीद बलदेव चंद के पिता ने बताया कि बीती 3 अगस्त को ही बलदेव छुट्टी बिताकर घर से ड्यूटी लौटा था। उसने जल्द ही वापस छुट्टी आने का वादा किया था। उन्होने बताया कि 17 सितंबर को बलदेव से उनकी फोन पर बात हुई थी। बलदेव ने बताया था कि वो ठीक-ठाक है। एक ऑपरेशन में है- तीन-चार लग जाएंगे।
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आतंकी मुठभेड़ में लगी गोली
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान बलदेव ने कई आतंकियों को ढेर किया, लेकिन वो खुद भी इस मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए। वहां मौजूद साथियों द्वारा बलदेव को उपचार के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां पर इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बलदेव के पिता हवलदार बिशन दास आर्मी से रिटायर हैं।
