शिमला/कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के एक व्यक्ति ने IGMC शिमला में अपने पिता की मृत्यु के बाद आंखें दान कर दी हैं। उसके पिता लंबे समय से फेफड़ों के रोग से ग्रसित थे। बीते कल ही उनकी मौत हुई है। हालांकि, उसके इस फैसले पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।

फेफड़ों का चल रहा था इलाज

जानकारी के अनुसार, कुल्लू के रहने वाले अशोक कुमार के पिता का लंबे समय से फेफड़ों का इलाज चल रहा था। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत खराब हो गई- जिसके चलते उन्हें बीती 11 सितंबर को CTVS विभाग में भर्ती करवाया गया। जहां बीते कल उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। यह भी पढ़ें: हिमाचल में एक साथ गायब हुई मां-बेटी, खोज में दर-दर भटक रहा परिवार

बेटे ने दान की पिता की आंखें

वहीं, अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने अशोक कुमार को नेत्रदान के बारे में जानकारी दी। अशोकबिना आनाकानी किए पिता की आंखें दान करने के लिए राजी हो गया।

ग्रामीणों ने परिवार को कोसा

अशोक ने बताया कि पिता के नेत्रदान करवाने की बात जब गांव में फैली तो गांव के बहुत सारे लोगों ने इस बात का विरोध किया। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने परिवार को कोसना शुरू कर दिया। मगर कुछ लोगों ने इस फैसले का समर्थन किया। यह भी पढ़ें: हिमाचल में कल यहां होगा पूर्व सैनिक भर्ती मेला, भरे जाएंगे इतने पद

आत्मा को नहीं मिलती है शांति

अशोक ने कहा कि लोगों को लगता है कि अगर किसी मृत व्यक्ति का कोई अंगदान कर दो तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसी अंध विश्वास के चलते लोग नेत्रदान या कोई भी अंगदान नहीं करते हैं।

मरने के बाद जरूर करें नेत्रदान

अशोक ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। ऐसा करने से किसी दूसरे की जिंदगी में उजाला आ सकता है। उसने कहा कि जरूरतमंदों की मदद करने के लिए हमें जीते-जी रक्त दान करना चाहिए और मरने के बाद नेत्रदान जरूर करना चाहिए। यह भी पढ़ें: हिमाचल : बस स्टेंड की तरफ जा रहा था युवक, सड़क पार करते टेंपो ने कुचला

समाज सेवा में खुश रहते थे पिता

अशोक ने बताया कि उसके पिता समाज सेवा करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता अभियान के तहत वो लोगों को नुक्कड़ नाटक के जरिए शिक्षा का महत्व बताते थे।

बात करने से भी कतराते हैं लोग

वहीं, IGMC सोटो के ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर नरेश ने बताया कि अस्पताल में दिनभर में कई मरीजों की मौत होती है। मगर लोग नेत्रदान व अंगदान के बारे में बात करने से भी कतराते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत कम लोग हैं- जो जरूरमंदों की मदद के लिए मौत के बाद अपने प्रियजनों के अंगदान करवाते हैं। यह भी पढ़ें: हिमाचल के 7 जिलों में अलर्ट : जीवन पर संकट- सड़कें-पुल टूटे, स्कूल बंद

कब होता है अंगदान और नेत्रदान?

नरेश ने बताया कि अंगदान ब्रेन डेड स्थिति में होता है। जबकि, नेत्रदान किसी व्यक्ति की मौत के बाद ही संभव होता है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान व्यक्ति की मौत के 6 घंटे के बाद किया जा सकता है।

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