मंडी। हिमाचल में डीजल के बढ़ते खर्च के बीच एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसें अब कमाई और बचत दोनों का रास्ता दिखा रही हैं। मंडी जिले में नई ई-बसों के संचालन का शुरुआती नतीजा सामने आया है।

HRTC की ई-बसों का कमाल

इसमें महज 24 दिनों में डीजल बसों की तुलना में लाखों रुपये की बचत दर्ज की गई है। यानी जिस सफर में पहले ईंधन पर मोटी रकम खर्च होती थी। वही दूरी अब बिजली से काफी कम लागत में पूरी हो रही है।

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मंडी में इलेक्ट्रिक बसों से फायदा

मंडी जिले को मिली 25 इलेक्ट्रिक बसों में से मंडी और सुंदरनगर डिपो में संचालित बसों ने 24 दिनों में कुल 19.32 लाख रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इससे जहां यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक परिवहन सुविधा मिल रही है। वहीं HRTC की परिचालन लागत कम करने में भी मदद मिल रही है।

मंडी की 15 बसों ने बचाए 11.34 लाख रुपये

मंडी डिपो की 15 इलेक्ट्रिक बसों ने इस अवधि में कुल 60,060 किलोमीटर की दूरी तय की। इन्हें चार्ज करने पर करीब 7.95 लाख रुपये का खर्च आया। अगर इतनी ही दूरी डीजल बसों से तय की जाती तो अनुमानित खर्च करीब 19.30 लाख रुपये होता। इस हिसाब से सिर्फ मंडी डिपो की ई-बसों से करीब 11.34 लाख रुपये की बचत हुई। यानी इलेक्ट्रिक बसों के जरिए एक तरफ यात्रियों को सफर की सुविधा मिली, तो दूसरी तरफ निगम के खर्च पर भी सीधा असर पड़ा।

सुंदरनगर डिपो में भी लाखों की बचत

सुंदरनगर डिपो की 10 इलेक्ट्रिक बसों ने 24 दिनों में 35,044 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान बसों की चार्जिंग पर करीब 2.10 लाख रुपये खर्च हुए। इसी दूरी को डीजल बसों से तय करने पर करीब 10.08 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान था। इस तरह सुंदरनगर डिपो को करीब 7.97 लाख रुपये की बचत हुई। दोनों डिपो की बचत को जोड़ने पर 24 दिनों में करीब 19.32 लाख रुपये का अंतर सामने आया है।

हर किलोमीटर पर बच रहा बड़ा खर्च

डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों में ऊर्जा लागत कम होने के कारण निगम को प्रति किलोमीटर करीब 12 से 13 रुपये तक की बचत हो रही है। लंबी दूरी वाले रूट पर इसका सीधा असर परिचालन खर्च पर पड़ता है। मंडी जिले में चल रही ई-बसें मंडी-शिमला, मंडी-चंडीगढ़ और मंडी-पालमपुर जैसे प्रमुख रूटों के अलावा कई स्थानीय रूटों पर भी सेवाएं दे रही हैं।

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चार्जिंग स्टेशन भी तैयार

ई-बसों के संचालन को सुचारू रखने के लिए मंडी बस स्टैंड, वर्कशॉप और सुंदरनगर में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा जंजैहली में भी नया चार्जिंग स्टेशन प्रस्तावित है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से ईंधन खर्च कम होने के साथ प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

डीजल का भी खर्च बचा

मंडी में शुरुआती 24 दिनों के आंकड़े HRTC के लिए इसलिए अहम हैं- क्योंकि अगर यही बचत लंबे समय तक बनी रहती है तो इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता बेड़ा निगम के परिचालन खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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