मंडी। हिमाचल प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए पंचायती राज चुनाव के बाद मंडी जिले के सरकाघाट क्षेत्र में जिला परिषद के थौना वार्ड-29 के चुनाव परिणाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा समर्थित प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने गिनती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है और भाजपा नेताओं ने निष्पक्ष जांच तथा पुनर्मतगणना की मांग की है।

मतगणना प्रक्रिया में नहीं बरती पारदर्शिता

जानकारी के अनुसार, बीते कल यानी मंगलवार को सरकाघाट से भाजपा विधायक दिलीप ठाकुर, भाजपा समर्थित प्रत्याशी रजनी देवी और कई समर्थकों के साथ उपायुक्त मंडी से मिले। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान पुनर्गणना (रिकाउंटिंग) की मांग को नजरअंदाज किया गया।

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उनका कहना है कि प्रत्याशी की ओर से बार-बार रिकाउंटिंग की मांग की गई, लेकिन अधिकारियों ने न तो आवेदन स्वीकार किया और न ही दोबारा मतों की गिनती करवाई। इतना ही नहीं, विधायक ने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दबाव में कार्रवाई होने के आरोप भी लगाए गए हैं।

न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे

विधायक दिलीप ठाकुर ने कहा कि, यदि दोबारा मतगणना नहीं करवाई गई तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। भाजपा इस मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रही है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी रजनी देवी ने कहा कि उन्हें चुनाव हारने का दुख नहीं है, लेकिन मतगणना प्रक्रिया को लेकर जो सवाल खड़े हुए हैं, उनका जवाब मिलना चाहिए।

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उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रिकाउंटिंग की मांग को उचित तरीके से नहीं सुना गया। रजनी देवी का कहना है कि वह अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी रास्ता भी अपनाएंगी।

आपत्ति के बावजूद नहीं सुनी पोलिंग एजेंट की बात

 

थौना वार्ड के चुनाव परिणाम में अंजनी देवी ने 3959 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि रजनी देवी को 3916 वोट मिले। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा, जिसके चलते विवाद और बढ़ गया। चुनाव में कुल 17,100 मत पड़े, जिनमें 16,952 वैध और 43 अवैध मत दर्ज किए गए।

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105 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। मतगणना के दौरान मौजूद एक पोलिंग एजेंट ने भी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि शुरुआत में सात मतगणना टेबल लगाए गए थे, लेकिन बाद में उनकी संख्या बढ़ाकर नौ कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बदलाव पर आपत्ति जताने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो

इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रत्याशी और उनके समर्थक अधिकारियों से पुनर्मतगणना की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

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