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July 14, 2026

हिमाचल की बड़ी आर्थिक जीत! बिना निवेश हर साल मिलेंगे 600 करोड़, PM के सामने साइन होगा MOU

8 साल का गतिरोध खत्म, किशाऊ परियोजना से हिमाचल की किस्मत बदलने की तैयारी

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cm sukhu MOU

शिमला। हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को एक और बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार को किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना के मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। वर्षों से अटकी इस परियोजना को अब नई दिशा मिल गई है और सबसे बड़ी बात यह है कि हिमाचल प्रदेश को इसमें कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ेगा, जबकि राज्य को हर साल करीब 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।

 

इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केंद्र सरकार और साझेदार राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने एमओयू का अंतिम ड्राफ्ट समीक्षा और टिप्पणियों के लिए हिमाचल सहित सभी संबंधित राज्यों को भेज दिया है।

 

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सीएम सुक्खू बोले— हिमाचल के हितों से नहीं होगा समझौता

एमओयू का ड्राफ्ट शिमला पहुंचते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को एक हाई-लेवल (उच्च स्तरीय) बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमओयू के एक-एक क्लॉज (प्रावधान) को बारीकी से जांचा जाए, ताकि भविष्य में भी हिमाचल के अधिकारों पर कोई आंच न आए।

पुराना ड्राफ्ट खारिज कर नई शर्ते मनवाईं

सीएम सुक्खू ने कहा कि हमारी सरकार ने हिमाचल के हितों को हमेशा सर्वोपरि रखा है। पूर्व की भाजपा सरकार ने इस परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में करीब ₹800 करोड़ का वित्तीय बोझ उठाना स्वीकार कर लिया था। लेकिन हमने राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उस पुराने ड्राफ्ट को सिरे से खारिज कर दिया। हमने कड़ा रुख अपनाकर नई शर्तें मनवाईं, जिसके तहत अब हिमाचल को बिना किसी पूंजीगत निवेश के अपने सभी वैध लाभ और ₹600 करोड़ का सालाना राजस्व मिलता रहेगा। 

 

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यह राशि आने वाले वर्षों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान उठाएंगे खर्च

परियोजना में शामिल अन्य साझेदार राज्य हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान बिजली एवं जल हिस्सेदारी से जुड़े खर्च वहन करेंगे। वहीं हिमाचल प्रदेश को अपनी आवश्यकता के अनुरूप जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही राज्य सरकार ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर जल पर अपने अधिकार को भी सुरक्षित रखा है, जिसे भविष्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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बीबीएमबी बकाया पर भी सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस दौरान भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये की वसूली के प्रयास भी तेज किए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला लंबे समय से लंबित है और प्रदेश अपने वैध अधिकारों के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

 

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हिमाचल की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया सहारा

राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से किशाऊ परियोजना को हिमाचल प्रदेश के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है। एक ओर राज्य को बिना निवेश के हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा, वहीं दूसरी ओर जल और ऊर्जा संसाधनों पर उसके अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। सरकार का दावा है कि यह समझौता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में हिमाचल की आर्थिक मजबूती, संसाधन सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास का आधार बनेगा।

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