शिमला। हिमाचल प्रदेश इन दिनों प्रकृति के भारी प्रकोप का सामना कर रहा है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें टूट चुकी हैं, जलापूर्ति बाधित है और बिजली व्यवस्था भी चरमरा गई है। बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
अगले 24 घंटे बेहद खतरनाक
सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से अधिकांश मौतें सीधे तौर पर बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुई हैं। स्थानीय मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में प्रदेश के सात जिलों- चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बाढ़ का खतरा जताया है। इस चेतावनी के साथ विभाग ने पूरे प्रदेश में 'येलो अलर्ट' भी जारी किया है, जो सोमवार तक जारी रहेगा।
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मानसून की दस्तक और तबाही की शुरुआत
मानसून ने 20 जून को हिमाचल प्रदेश में दस्तक दी थी और तब से लेकर अब तक प्राकृतिक आपदाओं की लंबी श्रृंखला चली आ रही है। आंकड़ों के अनुसार, महज 18 दिनों में प्रदेश में 23 बार बाढ़, 19 बार बादल फटने और 16 बार भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं। अब तक वर्षाजनित घटनाओं में 52 लोगों की जान गई है, जबकि 28 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। 35 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
227 सड़कें बंद, बिजली-पानी ठप
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार मंगलवार सुबह तक पूरे प्रदेश में 227 सड़कें बंद थीं। 163 ट्रांसफार्मर ठप हैं, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो चुकी है। इसके अलावा 174 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर मंडी ज़िले में पड़ा है, जहां अकेले 153 सड़कें, 140 ट्रांसफार्मर और 158 जल योजनाएं बंद पड़ी हैं।
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तबाही का मंजर, 12 जगह फटे बादल
मंडी जिला इस मानसून सीजन में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। सिर्फ 30 जून की रात को यहां 12 जगहों पर बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया और राहत-बचाव कार्यों में बाधा आई। अब तक मंडी में 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 28 लापता हैं। थुनाग, करसोग और गोहर इलाकों में सर्च ऑपरेशन जारी है, जहां ड्रोनों और खोजी कुत्तों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
692 करोड़ की संपत्ति तबाह
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, अब तक बारिश से राज्य को लगभग 692 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हो चुका है। इनमें से सबसे ज्यादा नुकसान जलशक्ति विभाग को (391 करोड़) और लोक निर्माण विभाग को (292 करोड़) हुआ है। बारिश से 164 मकान पूरी तरह और 191 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 364 पशुशालाएं, 27 दुकानें, 254 मवेशी और 10,000 पोल्ट्री पक्षी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं।
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मौतों का आंकड़ा
अब तक जो 80 मौतें दर्ज हुई हैं, उनमें से घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हैं-
- बादल फटने से: 14 मौतें
- बाढ़ में बहने से: 8
- पहाड़ी से गिरकर: 9
- पानी में डूबने से: 8
- करंट लगने से: 4
- सड़क हादसों में: 28 मौतें
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प्रशासन मुस्तैद, राहत कार्य जारी
हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन टीमें चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। सेना, ITBP, NDRF, होमगार्ड और स्थानीय पुलिस की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर की मदद से राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।
जनता से अपील
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और भूस्खलन संभावित इलाकों के आसपास जाने से परहेज करें। साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और आपात स्थिति में नजदीकी प्रशासनिक कार्यालय से संपर्क करें।
