मंडी। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों भारी संख्या में टूरिस्ट पहुंच रहे हैं। लेकिन बारिश के इस संवेदनशील मौसम में भी कुछ पर्यटक लापरवाही की हदें पार कर रहे हैं। ताजा मामला मंडी जिले का है, जहां जिला प्रशासन की लाउडस्पीकर से बार-बार की जा रही चेतावनी के बावजूद टूरिस्ट ब्यास नदी के किनारे, यहां तक कि नदी के बीचोंबीच उतरकर सेल्फी और मस्ती करते नजर आए।

लाउडस्पीकर चीखता रहा, मगर सेल्फी पर था फोकस

बुधवार सुबह मंडी जिला प्रशासन की एक बोलेरो गाड़ी लाउडस्पीकर पर यह ऐलान कर रही थी कि "पंडोह डैम से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है, कृपया नदी किनारे न जाएं। इसके बावजूद पंजाब और हरियाणा से आए कुछ पर्यटक नदी के बेहद नजदीक जाकर बच्चों समेत सेल्फी लेते दिखे। ये वही ब्यास नदी है, जिसने 2023 में पंचवक्त्र मंदिर तक को डुबो दिया था।

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कांगड़ा और कुल्लू में भी दोहराई गई लापरवाही

कांगड़ा की बनेर खड्ड इन दिनों उफान पर है, मगर फिर भी पर्यटक उसमें नहाने और फोटो खिंचवाने के लिए उतर रहे हैं। 22 मई को कुल्लू की मणिकर्ण घाटी में पार्वती नदी में जलस्तर बढ़ने से दो टूरिस्ट की मौत हो चुकी है। फिर भी कोई सीख लेने को तैयार नहीं।

2014 की भयावह त्रासदी को क्यों भूल रहे लोग?

गौरतलब है कि साल 2014 में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र ब्यास नदी में बह गए थे। वे भी सेल्फी के लिए नदी में उतरे थे और उसी वक्त लारजी डैम से पानी छोड़ा गया। कई शव 10-12 दिन बाद मिले थे।

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सीएम की अपील भी नजरअंदाज

प्रदेश के सीएम ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद पर्यटकों से एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में खतरा नहीं है, मगर नदी-नालों और पहाड़ी नालों के पास जाना जानलेवा हो सकता है।

साधुपुल में 20 लाख की SUV बहा चुके हैं टूरिस्ट

पिछले हफ्ते सोलन के साधुपुल में एक टूरिस्ट ने 20 लाख की नई SUV नदी में उतार दी। जल स्तर अचानक बढ़ा और गाड़ी फंस गई। बाद में जेसीबी से गाड़ी निकालनी पड़ी। ये सबक शायद अब भी बाकी टूरिस्टों तक नहीं पहुंचा

 

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