शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने स्कूली विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहतभरा फैसला लेते हुए शिक्षा तक पहुंच को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निजी बसों में पूरी तरह निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के चौथे चरण के तहत संचालित की जाने वाली एक हजार निजी बसों में लागू होगी।

 

सरकार के इस फैसले को ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से परिवहन खर्च के कारण स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह पहल छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है।

 

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एक हजार निजी बसों में मिलेगा फ्री सफर 

नई व्यवस्था के तहत राज्यभर में योजना के अंतर्गत खरीदी जाने वाली 1000 निजी बसों में 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा से जोड़ना तथा उनके परिवहन खर्च का बोझ कम करना है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से स्कूलों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षा के अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

 

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उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को भी राहत

केवल स्कूली छात्रों ही नहीं, बल्कि 12वीं कक्षा से ऊपर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को भी सरकार ने विशेष रियायत देने का फैसला किया है। ऐसे विद्यार्थियों को मात्र 5 रुपये में डे-पास उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके माध्यम से वे पूरे दिन यात्रा कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल कार्य दिवसों में मान्य होगी और रविवार तथा राजपत्रित अवकाशों के दौरान लागू नहीं रहेगी।

महिलाओं को भी मिलेगी किराये में आधी छूट

सरकार ने महिलाओं को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया है। योजना के तहत संचालित बसों में महिलाओं को प्रत्येक यात्रा पर किराये में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके लिए पात्र महिलाओं और विद्यार्थियों को विशेष हिमबस कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यात्रा संबंधी सुविधाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।

 

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डिजिटल तकनीक से होगी टिकटिंग व्यवस्था

योजना को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए बसों में आरएफआईडी आधारित इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से यात्रियों की पहचान और टिकटों का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी।

 

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रोजगार और स्वरोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

यह योजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार करेगी। बस संचालन के लिए केवल हिमाचल प्रदेश के वास्तविक निवासी ही आवेदन कर सकेंगे। आवेदकों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है तथा उनके पास कम से कम तीन वर्ष पुराना हैवी ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य होगा।

 

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रोजगार कार्यालय में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही चयन प्रक्रिया में पारिवारिक वार्षिक आय को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। बैंक डिफाल्टर उम्मीदवारों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा और चयनित आवेदकों को आरटीओ ड्राइविंग टेस्ट भी पास करना होगा।

इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करेगी। वहीं डीजल बसों के लिए 30 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। इससे युवाओं को परिवहन क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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