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August 17, 2026
सुक्खू सरकार अब खरीदेगी 1000 नई ई बसें, HRTC को बनाएगी आत्मनिर्भर; खत्म होगी वेतन-पेंशन की टेंशन
ग्रीन हिमाचल और HRTC को आत्मनिर्भर बनाने पर काम कर रही सुक्खू सरकार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक तरफ प्रदेश को हरित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। सरकार का फोकस डीजल बसों पर निर्भरता घटाकर इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन बसों के बेड़े को बढ़ाने पर है। सुक्खू सरकार अब प्रदेश में एक हजार नई ई बसें खरीदने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि कम संचालन लागत वाली इलेक्ट्रिक बसें आने वाले समय में HRTC के खर्च को कम करने और आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से जिले के लिए 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इन बसों के संचालन से मंडी और आसपास के क्षेत्रों में यात्रियों को पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से प्रदूषण कम करने के साथ HRTC के परिचालन खर्च को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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सुक्खू सरकार ने अपने पहले बजट में ‘ग्रीन हिमाचल’ की परिकल्पना रखी थी। अब इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते बेड़े को इसी विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ प्रदेश में निजी स्तर पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में HRTC के बेड़े में 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें और 200 हाइड्रोजन बसें शामिल करने की योजना है। इससे निगम का पारंपरिक डीजल बसों पर खर्च और निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस इन बसों से सार्वजनिक परिवहन को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकेगा।
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सरकार ने HRTC के इलेक्ट्रिक बस बेड़े को मजबूत करने के लिए 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी हैं। इनका संचालन शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचा भी तैयार किया जा चुका है। चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने के साथ आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री के अनुसार टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है। हालांकि वास्तविक परिचालन में इन बसों का प्रदर्शन निर्धारित रेंज से बेहतर भी रहा है। शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक बार चार्ज करने के बाद इलेक्ट्रिक बस के करीब 270 किलोमीटर तक चलने की बात सामने आई है।
इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा फायदा इनके कम परिचालन खर्च के रूप में सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऊर्जा लागत पर करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे HRTC के ईंधन खर्च को कम करने में मदद मिल रही है। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे निगम की कुल परिचालन लागत पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा। कम खर्च में बसों का संचालन होने से निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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सुक्खू सरकार ने HRTC को अगले पांच वर्षों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार HRTC को बसें खरीदकर उपलब्ध करवाती है और हर वर्ष करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। निगम अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि आधुनिक और कम खर्च वाली बसों के साथ HRTC की कमाई बढ़ाई जाए और सरकारी सहायता पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो।
HRTC की आर्थिक स्थिति मजबूत होने का सीधा फायदा निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने की उम्मीद है। यदि संचालन खर्च घटता है और आय में वृद्धि होती है तो निगम के लिए वेतन और पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों को पूरा करना आसान होगा। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य यही है कि HRTC को इतना मजबूत बनाया जाए कि कर्मचारियों और पेंशनरों के भुगतान को लेकर लगातार वित्तीय दबाव न रहे।
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HRTC के बेड़े में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन बसों की संख्या बढ़ाने की योजना को सरकार केवल पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर नहीं देख रही, बल्कि इसे निगम की आर्थिक मजबूती से भी जोड़ रही है। कम ऊर्जा लागत, आधुनिक बसें और बेहतर संचालन व्यवस्था आने वाले समय में HRTC के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती हैं।