शिमला। हिमाचल प्रदेश में नए साल के साथ-साथ गाड़ी वाले लोगों के लिए एक खास और नया बदलाव लेकर आया है। अब गाड़ी की फिटनेस या पासिंग कराने के लिए MVI यानी मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सरकार ने इसे पारदर्शी बनाने और इंसानों के हस्तक्षेप को खत्म करने के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (ATS) शुरू करने का निर्णय लिया है।
समय की होगी बचत, भ्रष्टाचार होगा कम
बता दें कि, प्रदेश सरकार ने इस नई व्यवस्था में गाड़ियों की फिटनेस पूरी तरह मशीन और आधुनिक तकनीक से जांची जाएगी। यानी इंस्पेक्टर पर भरोसा करना अब जरूरी नहीं रहेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावना पर भी लगाम लगेगा।
कहां शुरू होगा पहला ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन ?
इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। पहला ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन कांगड़ा सब डिविजन के रानीताल में 1 फरवरी से चालू होगा। शुरुआत में यहाँ कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रक, बस और टैक्सी की पासिंग की जाएगी।
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परिवहन विभाग के निदेशक नीरज कुमार ने बताया कि यह व्यवस्था वाहन मालिकों के लिए बहुत आसान और सुविधाजनक होगी। उनका कहना है कि हिमाचल में अब हर वाहन की फिटनेस तेज़, निष्पक्ष और समान रूप से मशीनों के जरिए जांची जाएगी।
ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन कैसे काम करेगा?
पहली बार हिमाचल में किसी ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन पर गाड़ियों की पासिंग पूरी तरह मशीनों से होगी। यहाँ ब्रेक, हेडलाइट, सस्पेंशन, प्रदूषण और अन्य तकनीकी मानकों की जांच स्वचालित तरीके से होगी। इससे हर वाहन की जाँच एक जैसी होगी और कोई इंस्पेक्टर पक्षपाती नहीं होगा।
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और किन जिलों में ATS खोले जा रहे हैं?
- प्रदेश में कुल 7 ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन खोले जा रहे हैं।
- सरकारी सेक्टर: हमीरपुर (नादौन) और ऊना (हरौली)
- प्राइवेट सेक्टर: कांगड़ा (रानीताल), मंडी (कांगू), बिलासपुर (बैरी), सिरमौर (पांवटा), सोलन (नालागढ़, राजपुरा)
- अभी पायलट प्रोजेक्ट के तहत रानीताल का ATS चालू हो गया है। अप्रैल के बाद बाकी जिलों के स्टेशनों पर भी वाहन पासिंग शुरू होगी।
पुराने सिस्टम में क्या थी दिक्कत ?
पहले हिमाचल में गाड़ियों की पासिंग मैन्युअल होती थी। सब डिविजन स्तर पर MVI अलग-अलग तारीखें तय करते थे। अगर वाहन मालिक तय दिन पर पासिंग नहीं कर पाते, तो अगली तारीख तक लंबा इंतजार करना पड़ता था। इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी।
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लेकिन अब ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर खुलने के बाद वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन गाड़ी पास करवा सकते हैं। इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया तेज और भरोसेमंद होगी।
सरकार ने पूरे हिमाचल में लाई नई तकनीक
प्रदेश सरकार की योजना है कि हर जिले में ATS खोला जाए। इसके बाद डिवीजन स्तर पर भी नए ऑटोमेटिक सेंटर खोले जा सकते हैं। परिवहन विभाग ने इसके लिए आवेदन का विकल्प भी खोल रखा है। इस बदलाव से हिमाचल की वाहन पासिंग प्रणाली आधुनिक, डिजिटल और पारदर्शी बन जाएगी। साथ ही आने वाले समय में पूरा प्रदेश इस नई तकनीक का लाभ ले पाएगा।
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हिमाचल में कितनी गाड़ियां हैं?
- हिमाचल में कुल 24,48,291 वाहन हैं। इनमें से कुछ प्रमुख वाहन इस प्रकार हैं:
- मोटरसाइकिल: 12,85,182
- कारें: 8,04,582
- गाइड्स करियर: 1,85,645
- मोटर कैब: 42,011
- ट्रैक्टर (कृषि): 22,309
- बसें: 11,226
- अन्य वाहन: मोटरसाइकिल स्कूटर, ट्रक, टैक्सी, तीन-पहिया वाहन, क्रेन, एम्बुलेंस आदि कई हजार
