शिमला। छोटे से पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का पहाड़ लगातार ऊंचा होता जा रहा है। पहले ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम कर्ज का बोझ झेल रहे प्रदेश में अब सुक्खू सरकार एक बार फिर 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही राज्य सरकार ने दो अलग-अलग किश्तों में यह ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि यह राशि विकास कार्यों में खर्च होगी, जबकि विपक्ष इसे प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेलने वाला कदम बता रहा है।

700 करोड़ का नया कर्ज लेने की तैयारी

राज्य सरकार ने 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह राशि 400 करोड़ और 300 करोड़ रुपये की दो किश्तों में जुटाई जाएगी। दोनों ऋणों की नीलामी 4 अगस्त को होगी, जबकि 5 अगस्त को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में पहुंच जाएगी।

 

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सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पहले इस्तेमाल की जा चुकी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के आधार पर ही यह नया ऋण लिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस राशि का उपयोग विभिन्न विकास परियोजनाओं पर किया जाएगा।

18 से 23 साल तक चुकाना होगा कर्ज

सरकार द्वारा लिए जा रहे 400 करोड़ रुपये के ऋण की अवधि 18 वर्ष निर्धारित की गई है, जिस पर करीब 7.78 प्रतिशत ब्याज देना होगा। वहीं 300 करोड़ रुपये का दूसरा ऋण 23 वर्षों के लिए लिया जाएगा, जिस पर लगभग 7.70 प्रतिशत की ब्याज दर लागू होगी। यानी आने वाले वर्षों तक प्रदेश को इस कर्ज की किस्तें और ब्याज दोनों चुकाने होंगे।

 

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पहले ही कर्ज के भारी बोझ तले दबा है हिमाचल

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही दबाव में है। राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये का स्तर पार कर चुका है। सीमित संसाधनों वाले इस पहाड़ी राज्य की आय अपेक्षाकृत कम है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार को बार-बार बाजार से ऋण लेना पड़ रहा है। इससे पहले जून महीने में भी राज्य सरकार ने 700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

राजस्व घाटा भी बना बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बाद हिमाचल की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं। सीमित राजस्व और बढ़ते खर्च के बीच सरकार के सामने विकास कार्यों को जारी रखना आसान नहीं रह गया है, जिसके चलते बार-बार बाजार से कर्ज लेने की जरूरत पड़ रही है।

 

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राजनीति भी तेज, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

नए कर्ज को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार विकास की बजाय कर्ज के सहारे प्रदेश चला रही है और हिमाचल को कर्ज के बोझ तले दबा दिया है।

 

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वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक संकट और भारी कर्ज की बड़ी वजह पिछली भाजपा सरकार की वित्तीय नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़कर गई थी, जिसका असर आज भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।

आज खाते में आएंगे वेतन और पेंशन

इस बीच शनिवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के खातों में वेतन और पेंशन की राशि जमा होने की उम्मीद है। हालांकि सरकार द्वारा लिया जा रहा नया ऋण 5 अगस्त को खजाने में पहुंचेगा, लेकिन वेतन और पेंशन का भुगतान पूर्व निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।

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