नाहन। हिमाचल ने आज अपना एक और जवान खो दिया। प्रदेश के सिरमौर जिला के गुमटी गांव में उस समय मातम पसर गया, जब भारतीय सेना के लांस लायक धर्मेंद्र के निधन की खबर पहुंची। वे महज 30 वर्ष के थे और पिछले 10 साल 5 महीनों से सेना में सेवाएं दे रहे थे। आज शनिवार दोपहर उनकी पार्थिव देह उनके घर पहुंची तो माहौल गमगीन हो गया। इस दौरान जब उनके पिता, जो हाल ही में हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने अपने जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं।
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छुट्टी पर घर आया था जवान
बता दें कि भारतीय सेना की 28वीं राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के लांस नायक धर्मेंद्र का दिल्ली कैंट स्थित आर्मी अस्पताल में निधन हुआ था। लांस नायक धर्मेंद्र पिछले करीब साढ़े 10 वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। धर्मेंद्र को 3 फरवरी से 2 मार्च तक 28 दिनों का पर्सनल आकस्मिक अवकाश मिला था। इसके बाद 3 मार्च से 17 मार्च तक वह 15 दिन के पितृत्व अवकाश पर थे। उनका मूल यूनिट 41 फील्ड रैजीमैंट था, लेकिन अगस्त 2024 से वह 28वीं बटालियन में सेवा प्रदान कर रहे थे।
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आर्मी अस्पताल में ली अंतिम सांस
इसी बीच 11 मार्च को उन्हें पीलिया की शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें दिल्ली के कमांड अस्पताल ले जाया गया, जहां वह हैपेटाइटिस.ए से ग्रस्त पाए गए। लिवर गंभीर रूप से प्रभावित होने से उनकी हालत काफी बिगड़ गई और 13 मार्च की सुबह उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली कैंट के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया और डायलिसिस दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान ही रात साढ़े 10 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा और डॉक्टरों ने करीब सवा 11 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जवान के निधन की खबर जैसे ही उनके परिजनों को मिली तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अभी छह माह पहले ही जिस घर में बेटे के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थी, आज उस घर में मातम पसर गया। बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र के घर बेटे के जन्म पर परिवार ने अभी कुछ दिन पहले ही भंडारा भी करवाया था। लेकिन किसे पता था कि खुशियों से भरा यह घर चंद दिनों में गमगीन हो जाएगा।
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अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सेना के जवान उनकी पार्थिव देह को लेकर शनिवार सुबह नारायणगढ़ पहुंचे। जहां उनका परिवार स्थायी रूप से रहता है। यहां से जवान की पार्थिव देह को स्थानीय श्मशानघाट ले जाया गया, जहां फर्स्ट पैरा बटालियन की टुकड़ी ने जवान को अंतिम गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान जवान को अंतिम विदाई देने भारी संख्या में लोग भी पहुंचे थे।
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धर्मेंद्र की अचानक हुई मृत्यु ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। छह महीने के बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया। होली से ठीक पहले जवान का जाना, पूरे गांव और इलाके के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। सिरमौर प्रशासन ने जवान की शहादत पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
