शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब परंपरागत हिमाचली टोपी पहनना जेल की हवा खिला सकता है और वह भी 7 साल तक के लिए।
वन्यजीवों के अंग की नुमाइश भी बंद
इस बारे में वन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि अगर परंपरागत हिमाचली टोपी में किसी ने मोनाल पक्षी की कलगी लगाई या मंदिरों में धार्मिक उत्सव के दौरान हिमाचल के राज्य पक्षी जुजुराना (वेस्टर्न ट्रैगोपान) के पंखों को प्रदर्शित किया तो उसे 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।
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यही नहीं, घर पर हिरण को छोड़कर अन्य जंगली जानवरों के सींग या अंगों को रखना, सोशल मीडिया पर साझा करना भी जेल भिजवा सकता है। वन्य प्राणी प्रभाग के सीसीएफ की ओर से आदेश में कहा गया है कि अगर कहीं भी नियमों का उल्लंघन होता दिखे तो वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत कार्रवाई की जाए।
जेल और जुर्माना दोनों
मोनाल, जुजुराना और इसके जैसे पक्षी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल हैं। उनकी कलगी, पंख, ट्रॉफी आदि को पहनना, रखना या प्रदर्शित करना कानूनन अपराध है। ऐसा करने पर 3 से 7 साल की जेल और कम से कम 10,000 रुपये जुर्माना लग सकता है।
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विलुप्त होने की कगार पर मोनाल
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू, किन्नौर और चंबा में मोनाल की कलगी को टोपी पर लगाकर पहनने की परंपरा है। हिमाचली कलाकारों और नेताओं की टोपियों में भी कलगी लगी देखी जा सकती है। देव स्थलों पर जुजुराना पक्षी के पंखों को श्रद्धा से रखा जाता है। लेकिन वन विभाग का मानना है कि इन पक्षियों की कलगी और पंखों की इस तरह नुमाइश करने से उनके शिकार को बढ़ावा मिलता है। ये पक्षी पहले ही विलुप्त होने की कगार पर है।
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पंजीकरण करने वालों पर पाबंदी
हिमाचल सरकार ने 2003 में इन पक्षियों की कलगी और पंखों को प्रदर्शन करने के लिए पंजीकरण का नियम बनाया था। लेकिन अब रजिस्ट्रेशन करने वाले भी हिमाचली टोपी में इनकी नुमाइश नहीं कर पाएंगे। हालांकि, अगर किसी के पास सीसीएफ का स्वामित्व प्रमाण पत्र है, तो वह इन्हें अपने पास रख सकता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से इन्हें दिखाने या पहनने की अनुमति नहीं होगी।
