शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में राम मंदिर के हॉल में होने वाले एक निकाह समारोह को लेकर उपजा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। हिन्दू संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तावित सामूहिक मुंडन कार्यक्रम फिलहाल टल गया है लेकिन समिति ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कार्यक्रम रद्द होने का कारण

समिति के संयोजक विजय शर्मा ने जानकारी दी कि आज राम मंदिर के बाहर प्रस्तावित सामूहिक मुंडन का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिमला पुलिस ने समिति के प्रमुख सदस्यों को 'हाउस अरेस्ट' कर लिया है जिससे वे आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच सके। सह-संयोजक मदन ठाकुर ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को नजरबंद किए जाने का दावा किया।

 

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विरोध की मूल वजह: 'सांस्कृतिक अतिक्रमण'

विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी विशेष समुदाय की शादी या खुशी के खिलाफ नहीं था। समिति का ऐतराज इस बात पर था कि मंदिर के परिसर का उपयोग निकाह जैसे धार्मिक समारोहों के लिए क्यों किया जा रहा है। उन्होंने इसे 'सांस्कृतिक अतिक्रमण' करार दिया।

निकाह का स्थान बदला गया

विवाद बढ़ता देख संबंधित परिवार ने निकाह समारोह को मंदिर हॉल से कहीं और स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। शर्मा के अनुसार जैसे ही समारोह का स्थान बदला गया, समिति का मुख्य उद्देश्य पूरा हो गया था और विरोध का मूल कारण समाप्त हो गया था।

 

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सरकार और पुलिस पर निशाना

मुख्य मांग पूरी हो चुकी थी, फिर भी समिति ने सांकेतिक रूप से मुंडन करने का निर्णय लिया था ताकि भविष्य में ऐसे 'अतिक्रमण' न हों। विजय शर्मा ने कहा- सरकार ने हमारे शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध को कुचलने के लिए पुलिस का सहारा लिया है। ये लोकतंत्र और संविधान पर हमला है।

 

ये पूरा मामला शिमला के ऐतिहासिक राम मंदिर के व्यावसायिक हॉल में प्रस्तावित एक निकाह की रिसेप्शन पार्टी से शुरू हुआ था। जैसे ही ये खबर फैली, हिन्दू संघर्ष समिति ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और विरोध स्वरूप सामूहिक मुंडन कराने का ऐलान किया था। फिलहाल भारी पुलिस बल की तैनाती और नेताओं की नजरबंदी के बीच स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।