कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की शाहपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित बोह घाटी में बादल फटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। देखते ही देखते मलबे और तेज बहाव ने घर, पशुशालाएं, खेत और मवेशियों को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में जहां भारी संपत्ति का नुकसान हुआ, वहीं एक महिला की समय रहते दिखाई गई सतर्कता ने बड़ा हादसा टाल दिया।
मैला पानी देखकर समझ गईं आने वाला है खतरा
गड़गून गांव की रहने वाली राणो देवी उस समय अपने घर के बाहर थीं। लगातार हो रही बारिश के बीच उनकी नजर गांव के साथ बहने वाले नाले पर पड़ी। उन्होंने देखा कि नाले का पानी अचानक मटमैला हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने के अनुभव और चार वर्ष पहले बोह घाटी में बादल फटने से हुई भीषण तबाही की याद ने उन्हें तुरंत खतरे का आभास करा दिया।
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उन्हें समझते देर नहीं लगी कि ऊपरी क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर आ रहा है और कुछ ही देर में गांव इसकी चपेट में आ सकता है। यदि उन्होंने समय पर लोगों को चेतावनी न दी होती, तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी।
कुछ ही पलों में मलबे ने मचा दी तबाही
खतरे को भांपते ही राणो देवी गांव की गलियों में दौड़ पड़ीं और जोर-जोर से लोगों को चेतावनी देने लगीं "भागो... नाले में फ्लड आ रहा है... अपनी जान बचाओ..."। उनकी आवाज सुनते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोग बिना देर किए अपने घरों से बाहर निकल आए। किसी ने छोटे बच्चों को गोद में उठाया, किसी ने बुजुर्गों का सहारा लिया और सभी सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
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कुछ ही मिनटों में गांव लगभग खाली हो चुका था। चेतावनी के थोड़ी ही देर बाद तेज गर्जना के साथ मलबे और पानी का विशाल सैलाब गांव में पहुंच गया। देखते ही देखते कई मकान, पशुशालाएं और खेत मलबे में दब गए। कई मवेशी भी बाढ़ की चपेट में आ गए। पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घर का सामान तक नहीं बचा पाए लोग
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस आपदा में बोह घाटी के विभिन्न इलाकों में 18 मकान और एक स्कूल भवन क्षतिग्रस्त या बह गए। गांव का बड़ा हिस्सा मलबे से पट गया और लोगों की वर्षों की मेहनत कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई। बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को अपने घरों से जरूरी सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। कपड़े, नकदी, गहने, राशन और घरेलू सामान सब कुछ मलबे में दब गया।
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कई परिवारों ने अपने पशु भी खो दिए। अब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे या राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। राणो देवी का कहना है कि चार वर्ष पहले इसी क्षेत्र में बादल फटने की घटना में कई लोगों की मौत हुई थी। उस दर्दनाक हादसे की याद आज भी उनके मन में ताजा थी। जैसे ही उन्होंने नाले का बदला हुआ स्वरूप देखा, उन्हें महसूस हो गया कि स्थिति गंभीर है। यही अनुभव इस बार कई परिवारों की जान बचाने का कारण बन गया।
ग्रामीण बोले- हमारे लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं
गांव के लोगों का कहना है कि यदि राणो देवी समय रहते आवाज न लगातीं तो शायद कई परिवार मलबे की चपेट में आ जाते। ग्रामीण उन्हें अपने लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं मान रहे हैं। उनकी सतर्कता के कारण करीब 12 परिवारों के सदस्य समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके और एक बड़ा हादसा टल गया।
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बोह घाटी के साथ लगते स्पैड़ा गांव में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। यहां कम से कम छह मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नालों में आए तेज बहाव और मलबे ने दोनों गांवों में व्यापक नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
