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September 3, 2026
हिमाचल के सरकारी सिस्टम में बड़ा गोलमाल! कैग रिपोर्ट ने खोली खरीद से लेकर टैक्स चोरी तक की पोल
घाटे में डूबे सरकारी उपक्रमों का संचित घाटा ₹4,985 करोड़ पार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों की कार्यप्रणाली पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च 2023 को समाप्त अवधि की संयुक्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट में सरकारी खरीद व्यवस्था से लेकर जीएसटी और ई-वे बिल प्रणाली तक कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट ने जहां ई-टेंडरिंग में मिलीभगत और संदिग्ध बोलियों को उजागर किया है, वहीं टैक्स चोरी के मामलों और लगातार घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों की खराब वित्तीय स्थिति की भी तस्वीर सामने रखी है।
सरकारी खरीद में पारदर्शिता के लिए शुरू किए गए ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में ही कैग को गंभीर खामियां मिली हैं। जांच में कुछ मामलों में एक ही IP एड्रेस या विभागीय IP एड्रेस से कई बोलियां लगाए जाने की बात सामने आई। बोलियों के बीच मामूली अंतर और एक जैसी गतिविधियां ठेकेदारों के बीच संभावित मिलीभगत और रोटेशनल कार्टेल की ओर संकेत करती हैं। कैग ने ऐसी संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने के लिए सिस्टम में अलर्ट आधारित निगरानी मजबूत करने की सिफारिश की है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में शुरू किए गए ई-प्रोक्योरमेंट प्रोजेक्ट के कई साल बाद भी इसके सभी प्रस्तावित मॉड्यूल पूरी तरह लागू नहीं हो सके। विक्रेता प्रबंधन, ई-आक्शन और ई-पेमेंट जैसे तीन मॉड्यूल ही आंशिक रूप से लागू पाए गए, जबकि मांग, कैटलॉग और संविदा प्रबंधन से जुड़े मॉड्यूल शुरू नहीं हुए थे। इतना ही नहीं, 100 खरीद इकाइयों में से 16 ने पोर्टल बनने के बाद से इसका इस्तेमाल तक नहीं किया। इनमें टांडा मेडिकल कॉलेज, युवा सेवा एवं खेल निदेशालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा जैसी संस्थाएं भी शामिल हैं।
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कैग की रिपोर्ट ने जीएसटी और ई-वे बिल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पोर्टल पर एक ही चालान से कई ई-वे बिल बनाए जाने की स्थिति का फायदा उठाकर करदाताओं ने कम टैक्स चुकाया, जिससे राजकोष को करीब ₹4.43 करोड़ का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि नौ करदाताओं ने वास्तविक रूप से प्राप्त ₹314.92 करोड़ के मुकाबले ₹335.26 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम किया। यानी करीब ₹20.34 करोड़ का अतिरिक्त ITC लिया गया।
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कैग के अनुसार 10 सर्कलों में टैक्स से जुड़े 256 मामलों में ₹49.56 करोड़ की मांग के नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि तीन साल बीतने के बावजूद विभाग इनमें से केवल ₹2.09 करोड़ की ही वसूली कर सका। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 323 करदाताओं ने ₹2.43 करोड़ का टीडीएस स्वीकार किया, लेकिन अपना करयोग्य कारोबार शून्य दिखाया। इससे करीब ₹121.33 करोड़ के कारोबार को छिपाने और लगभग ₹21.84 करोड़ की जीएसटी चोरी का अनुमान लगाया गया।
कैग रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा सरकारी उपक्रमों की वित्तीय स्थिति से जुड़ा है। घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों का कुल नुकसान वर्ष 2021-22 के ₹498.55 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹604.94 करोड़ हो गया। बिजली क्षेत्र से जुड़े उपक्रमों और हिमाचल पथ परिवहन निगम का इस बढ़ते घाटे में बड़ा योगदान बताया गया है। 31 मार्च 2023 तक राज्य के 14 सरकारी उपक्रमों का कुल संचित घाटा ₹4,985.18 करोड़ पहुंच चुका था। इनमें से नौ उपक्रमों की नेटवर्थ पूरी तरह खत्म होकर ऋणात्मक हो गई। ऐसे आंकड़े सरकारी कंपनियों के वित्तीय प्रबंधन और लगातार बढ़ती देनदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
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कैग रिपोर्ट में सरकारी कंपनियों के लेखों और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर भी कमियां सामने आई हैं। 30 सितंबर 2023 तक 27 सरकारी कंपनियों ने वर्ष 2022-23 के अपने लेखे ऑडिट के लिए कैग को प्रस्तुत नहीं किए थे। इसके अलावा स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, वार्षिक आम बैठकें आयोजित करने और ऑडिट कमेटी गठित करने जैसी अनिवार्य व्यवस्थाओं के पालन में भी कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट में कैग ने केवल खामियां गिनाने तक सीमित रहने के बजाय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। ई-प्रोक्योरमेंट में संदिग्ध बोली और एक ही IP एड्रेस से होने वाली गतिविधियों को पकड़ने के लिए अलर्ट एल्गोरिदम विकसित करने, ई-वे बिल में एक ही चालान से कई बिल बनने पर अधिकारियों को तत्काल सूचना देने और जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों पर मजबूत निगरानी तंत्र बनाने की सिफारिश की गई है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कैग की रिपोर्ट सदन में पेश की। रिपोर्ट के खुलासों ने हिमाचल के सरकारी विभागों में खरीद प्रक्रिया, टैक्स प्रशासन और सार्वजनिक उपक्रमों के वित्तीय प्रबंधन की तस्वीर सामने रख दी है। अब इन कमियों को दूर करने और सरकारी खजाने को हो रहे नुकसान पर लगाम लगाने के लिए सरकार की कार्रवाई पर नजर रहेगी।