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September 3, 2026

हिमाचल: एंबुलेंस बनी ‘डिलीवरी रूम’! अस्पताल पहुंचने से पहले 108 में गूंजी जुड़वां बच्चों की किलकारी

EMT और चालक ने सूझबूझ से कराया सुरक्षित प्रसव

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chamba ambulance

चंबा। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में 108 एंबुलेंस सेवा लोगों के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है। दुर्गम रास्तों और अस्पतालों की दूरी के बीच कई बार यही एंबुलेंस मरीजों को समय पर इलाज तक पहुंचाकर उनकी जान बचाती है। इतना ही नहीं, कई आपात परिस्थितियों में 108 एंबुलेंस में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी करवाया जा चुका है। ऐसा ही एक सुखद और राहत भरा मामला अब चंबा जिला के डल्हौजी उपमंडल से सामने आया है, जहां अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस के भीतर जुड़वां बच्चों की किलकारियां गूंज उठीं।

आधी रात को उठी प्रसव पीड़ा

ढलोग पंचायत के बडेरू गांव निवासी पवन कुमार की पत्नी माया देवी को बुधवार देर रात करीब 12 बजे अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हालत बिगड़ती देख परिजनों ने बिना समय गंवाए 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। सूचना मिलते ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनीखेत से एंबुलेंस तुरंत गांव पहुंची और माया देवी को लेकर नागरिक अस्पताल डल्हौजी के लिए रवाना हो गई।

 

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रास्ते में बढ़ गया दर्द, एंबुलेंस को रोकना पड़ा

अस्पताल की ओर जाते समय रास्ते में माया देवी की प्रसव पीड़ा अचानक काफी बढ़ गई। स्थिति को देखते हुए परिजनों के आग्रह पर एंबुलेंस को रास्ते में ही सुरक्षित स्थान पर रोकना पड़ा। उस समय सबसे बड़ी चुनौती महिला को सुरक्षित प्रसव करवाने की थी, क्योंकि अस्पताल अभी दूर था।

एंबुलेंस में कराया प्रसव

आपात स्थिति में एंबुलेंस में तैनात ईएमटी सिकंदर ने अपनी ट्रेनिंग और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मोर्चा संभाला। उन्होंने महिला को हिम्मत दी और उपलब्ध संसाधनों के बीच एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव करवाने की प्रक्रिया शुरू की। कुछ ही देर में माया देवी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। आधी रात के सन्नाटे के बीच एंबुलेंस में नवजात बच्चों की किलकारियां गूंज उठीं तो परिजनों की चिंता खुशी में बदल गई।

 

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चालक रोहित ने भी दिखाई तत्परता

प्रसव के तुरंत बाद एंबुलेंस के चालक रोहित ने बिना समय गंवाए महिला और दोनों नवजात शिशुओं को नागरिक अस्पताल डल्हौजी पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने जच्चा और दोनों बच्चों की जांच की। जांच के बाद तीनों को स्वस्थ और खतरे से बाहर बताया गया।

108 कर्मियों के लिए परिजनों ने कही बड़ी बात

मुश्किल घड़ी में एंबुलेंस के भीतर सुरक्षित प्रसव होने के बाद माया देवी के परिजनों ने ईएमटी सिकंदर और चालक रोहित का आभार जताया। परिजनों के लिए वह रात किसी परीक्षा से कम नहीं थी, लेकिन एंबुलेंस कर्मियों की सूझबूझ और हिम्मत ने इस मुश्किल परिस्थिति को सुरक्षित अंजाम तक पहुंचाया।

 

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पहाड़ों में 108 सेवा क्यों है इतनी अहम?

हिमाचल के पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में कई गांव अस्पतालों से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में अचानक तबीयत बिगड़ने, दुर्घटना होने या प्रसव पीड़ा शुरू होने पर हर मिनट बेहद अहम हो जाता है। 108 एंबुलेंस सिर्फ मरीज को अस्पताल पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि कई बार रास्ते में ही जीवन बचाने वाली पहली चिकित्सा व्यवस्था बन जाती है। चंबा का यह मामला भी बताता है कि प्रशिक्षित एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और सही समय पर लिया गया फैसला कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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