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September 3, 2026
मंत्री विक्रमादित्य सिंह का मास्टर प्लान: 98 गांवों की बदलेगी तस्वीर; सड़कों से जोड़ने को बन रही DPR
सड़कों को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूला जाएगा भारी भरकम जुर्माना
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कई गांव आज भी सड़क सुविधा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में अब सुक्खू सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग ने कांगड़ा और चंबा जिले के 98 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
लोक निर्माण विभाग के कांगड़ा जोन ने सड़क से वंचित गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। संबंधित मंडलों में इन सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है। डीपीआर तैयार होने के बाद इसे स्टेट टेक्निकल एजेंसी के पास भेजा जाएगा, जहां तकनीकी जांच और निरीक्षण के बाद प्रस्ताव प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे।
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केंद्र से स्वीकृति मिलने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन गांवों में सड़क निर्माण का रास्ता साफ होगा। विभाग का यह कदम खासतौर पर चंबा जैसे दुर्गम पहाड़ी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कई बस्तियों तक पहुंच आज भी चुनौती बनी हुई है।
इस परियोजना में चंबा जिले के 77 गांव शामिल किए गए हैं, जबकि कांगड़ा के 21 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का प्रस्ताव है। गांवों के चयन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्धारित मानकों को आधार बनाया गया है। चयनित गांवों की आबादी 250 से अधिक है।
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सड़क पहुंचने से इन गांवों के लोगों को सबसे बड़ा फायदा रोजमर्रा के आवागमन में होगा। इसके साथ ही ग्रामीणों के लिए अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। सड़क संपर्क बेहतर होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
विभाग के मुताबिक जिन गांवों में सड़क निर्माण प्रस्तावित है, वहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेस-2 के मानकों को पूरा करना जरूरी होगा। वन भूमि आने की स्थिति में फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट यानी एफसीए की मंजूरी लेनी होगी। वहीं निजी जमीन वाले हिस्सों में भूमि विभाग के नाम होना जरूरी है। इन औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभाग अब डीपीआर तैयार करने पर फोकस कर रहा है, ताकि प्रस्ताव को तकनीकी जांच और सरकारों की मंजूरी के अगले चरण में भेजा जा सके।
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में विभाग प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कांगड़ा जोन के तहत आने वाले 98 गांवों को सड़क से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होना इसी दिशा में एक अहम कदम है। कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंता विकास सूद के अनुसार 98 गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए डीपीआर तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद प्रस्ताव स्टेट टेक्निकल एजेंसी को भेजे जाएंगे और इसके बाद प्रदेश तथा केंद्र सरकार से मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
वहीं, लोक निर्माण विभाग सड़कें बनाने के साथ-साथ मौजूदा सड़क ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए भी सख्त कदम उठा रहा है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन में सड़क के ढांचे को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
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सड़क को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में पुनर्स्थापन लागत का पांच गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा सड़क किनारे अतिक्रमण, मलबा डालने और जब्त वाहनों को सड़क किनारे छोड़ने जैसे मामलों पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया जा रहा है।
सड़क संरक्षण से जुड़े नए प्रावधानों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल किया गया है। जीपीएस और भू-स्थानिक तकनीक की मदद से प्रदेश की सड़कों की डिजिटल मैपिंग कर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर मैप तैयार करने का प्रावधान है। इन डिजिटल नक्शों को इलेक्ट्रॉनिक रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा और डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए उनकी प्रमाणिकता सुनिश्चित की जाएगी।