#अव्यवस्था
July 22, 2026
हिमाचल में डाकिए का कारनामा : डेढ़ साल से नहीं बांटी एक भी डाक, कमरे से मिला चिट्ठियों का ढेर
निरीक्षण के दौरान खुली बड़ी लापरवाही की पोल
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें लोगों तक समय पर डाक नहीं पहुंचाई गई और महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज महीनों तक डाक कर्मचारियों के पास ही पड़े रहे।
अब ऐसा ही एक और चौंकाने वाला मामला कांगड़ा जिले के सुजानपुर क्षेत्र से सामने आया है। जहां एक ग्रामीण डाक सेवक के कमरे से डेढ़ साल के दौरान जमा हुई बड़ी मात्रा में डाक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और कई सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं।
मामला कांगड़ा जिले के उपमंडल सुजानपुर के उपडाकघर भलेठ के तहत आने वाली डाक शाखा करोट का है। आरोप है कि संबंधित ग्रामीण डाक सेवक करीब 20 गांवों के लोगों तक उनकी जरूरी डाक पहुंचाने के बजाय उसे अपने कमरे में ही जमा करता रहा। शिकायतें मिलने के बाद विभाग ने जांच की तो पूरा मामला सामने आ गया। फिलहाल आरोपी डाक कर्मचारी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार डाक विभाग को लंबे समय से संबंधित डाकिए के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद डाक निरीक्षक आशीष शर्मा निरीक्षण के लिए डाक शाखा करोट पहुंचे। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि काफी डाक 'होल्ड' पर दिखाई गई है।
जब निरीक्षक ने संबंधित पते पर फोन कर लोगों से संपर्क किया तो कई लोगों ने बताया कि उन्हें आज तक डाक मिली ही नहीं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि डाक तो मिली थी, लेकिन उनसे प्राप्ति के हस्ताक्षर तक नहीं करवाए गए थे। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ और गहन जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान जब संबंधित डाकिए के कमरे की तलाशी ली गई तो वहां से डेढ़ साल के अंतराल में लोगों के नाम आई बड़ी संख्या में चिट्ठियां, सरकारी दस्तावेज, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ATM कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण डाक सामग्री बरामद हुई।
बताया जा रहा है कि डाकिया कुछ डाक लोगों तक पहुंचाता था, जबकि बाकी डाक अपने कमरे में ही रख लेता था। इस लापरवाही से करोट डाक शाखा के अंतर्गत आने वाले करीब 20 गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आरोपी डाक कर्मचारी मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला बताया जा रहा है।
मामले के सामने आने के बाद डाक विभाग ने आरोपी ग्रामीण डाक सेवक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी लंबी अवधि तक डाक वितरण में लापरवाही कैसे होती रही और निगरानी व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई। विभाग ने यह भी बताया कि कमरे से बरामद सभी डाक और दस्तावेजों को संबंधित लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले मंडी जिले के चौंतड़ा डाकघर के अंतर्गत आने वाले गोलवां और जलपेहड़ क्षेत्रों में भी दो ग्रामीण डाक सेवकों की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। दोनों कर्मचारी कागजों में ही डाक वितरण दिखाते रहे, जबकि लोगों तक डाक पहुंची ही नहीं।
उनके किराये के कमरे से भी महीनों पुराने रजिस्टर्ड पत्र, आधार कार्ड, सरकारी दस्तावेज और स्थानीय विधायक के नाम आई डाक बरामद हुई थी। उस मामले में भी दोनों डाक सेवकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।