मंडी। सरकारों का गठन इसीलिए किया जाता है ताकि वो जनहित में योजनाओं का गठन करें। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश सरकार की एक योजना काफी चर्चा में है और लोगों को लाभ भी दे रही है। इस योजना ने किसानों की जिंदगी की रूपरेखा ही बदल दी है।
11.5 हेक्टेयर क्षेत्र पर लगाई प्लम की 4 किस्में
ये कहानी प्रदेश के मंडी जिले के खगरांओ गांव की है जहां बागवानी विभाग ने 36 किसानों का क्लस्टर बनाया। फिर किसानों ने लगभग 11.5 हेक्टेयर भूमि पर प्लम की चार किस्मों- ब्लैक एंबर, रेड ब्यूट, सेंटा रोसा और फ्रायर के 7428 पौधे लगाए। इसी से गांव को फलगांव की पहचान भी मिली।
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जानवरों से फसलों की रक्षा के लिए की बाड़बंदी
योजना के जरिए जिन जमीनों को जंगली जानवरों के कारण अनुपयोगी माना जाता था, उन्हें फल उत्पादन से जोड़ा गया। बंदर, सूअर जैसे जानवरों से फसलों की रक्षा के लिए बाड़बंदी की गई। सिंचाई और संरक्षण की पूरी व्यवस्था भी है जिससे किसानों को अच्छी उपज और बढ़िया दाम मिलता है।
अब लाखों में पहुंच गई है किसानों की आमदनी
पहले जो किसान खेतों में सिर्फ मक्की और गेंहू उगाते थे, अब उन खेतों में फलों की फसल लहलहा रही है। किसानों का ये भी कहना है कि गेहूं और मक्की की फसल से उनकी आय बहुत कम होती लेकिन फलों से उनकी आमदनी लाखों में पहुंच गई है।
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विभाग ने क्या-क्या सुविधाएं निशुल्क दी ?
- टपक सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation System)
- 2 लाख लीटर का जल टैंक
- पंप हाउस व दो बोरवेल
- बिजली ट्रांसफार्मर व सोलर बाड़बंदी
- कृषि उपकरण, उर्वरक व कीटनाशक
- प्लम के 7428 पौधे (चार किस्मों में)
- समय-समय पर मुफ्त प्रशिक्षण
सरकार योजना के तहत दिलवाती है ट्रेनिंग
हिमाचल सरकार की इस योजना का नाम है- HP शिवा परियोजना जिसके जरिए किसानों को फल की खेती करने की ट्रेनिंग दी जाती है। योजना के चलते महिलाओं को भी रोजगार का अवसर मिलता है। फलगांव के नाम से विख्यात खगरांओ गांव सरकार की योजना का सटीक उदाहरण है।
