शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं, लेकिन आरक्षण रोस्टर को लेकर अब भी इंतजार बना हुआ है। पहले जहां सरकार ने 25 मार्च तक रोस्टर जारी करने का लक्ष्य रखा था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 27 मार्च कर दिया गया है। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह विधानसभा सत्र को बताया जा रहा है, जिसके चलते प्रशासनिक व्यस्तता बढ़ गई और तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
31 मार्च के बाद होगी चुनाव तारीखों की घोषणा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायतीराज विभाग 31 मार्च तक चुनाव से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप देगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
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माना जा रहा है कि अप्रैल माह में चुनाव अधिसूचना जारी हो सकती है, जिसके बाद प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी और चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी।
आरक्षण रोस्टर की देरी का असर
आरक्षण रोस्टर चुनाव प्रक्रिया का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होता है कि किन सीटों पर सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा।
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ऐसे में इस प्रक्रिया में देरी का असर चुनावी कार्यक्रम पर भी पड़ता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित तिथि के भीतर रोस्टर जारी कर दिया जाएगा, ताकि आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
पार्षद ही करेंगे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन
इस बीच कैबिनेट बैठक में नगर पंचायत और नगर परिषदों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी अहम चर्चा हुई। प्रत्यक्ष चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। कई मंत्रियों ने यह तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था अधिक संतुलित है और इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व बेहतर तरीके से सुनिश्चित होता है।
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अंततः यह निर्णय लिया गया कि पहले की तरह पार्षद ही आपस में मतदान कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करेंगे। इस फैसले से स्थानीय राजनीति में पार्षदों की भूमिका और प्रभाव बरकरार रहेगा, साथ ही राजनीतिक समीकरण भी काफी हद तक उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते रहेंगे।
